गुरू के बिना कोई भवसागर नहीं तर सकता, चाहे वह ब्रहमा और शंकरजी समान ही क्यों न हो: स्वामी विवेकानंद गिरि महाराज

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स्वामी तुरियानंद जी महाराज का 55वाॅ निर्वाण दिवस महोत्सव संत सम्मेलन के साथ सम्पन्न

हरिद्वार। बह्रलीन श्री श्री 1008 स्वामी तुरियानंद जी महाराज का 55वाॅ निर्वाण दिवस महोत्सव संत सम्मेलन के साथ मनाया गया।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में सभी अखाड़ो के महामण्डलेश्वर,महंत साध्ु संतो के अलावा विभिन्न प्रांतो से श्रद्वालुगण शामिल हुए।
संत सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद गिरि जी ने कहा कि जिस तरह कचरे मे ढेर में पड़ा हुआ तांबे का टुकड़ा बिजली के लाईन के साथ जुड़कर प्रकांड शक्ति अर्जित कर लेता है,उसमें उतनी ही ताकत आ जाती है,जितनी एक पावर हाऊस होती है। ठीक इसी तरह माया की उलक्षन में पड़ा हुआ जीव जब सतगुरू रूपी चन्दन के वृक्ष के साथ जुड़ जाता है तो गुरूदेव,अपनी तरह उसे शक्ति पात करके उसकी चेतना को पूर्ण बह्म -निरंकार के साथ जोड़ देता है। उसमें भी अनन्त भक्ति की शक्ति का उदय का पिफर विस्तार होने लगता है। इसलिए गोस्वामी तुलसी दास ने कहा है कि वही आपको जानता है,जिसे आप जना देते है,और जानते ही वह आपका ही स्वरूप बन जाता है। कहा कि गुरू के बिना कोई भवसागर नही तर सकता,चाहे वह ब्रहमा और शंकरजी समान ही क्यों न हो। संत सम्मेलन में साध्ना सदन आश्रम पीठाध्ीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्दपुरी जी महाराज, म.म.स्वामी दिव्यानंदपुरी जी महाराज, महंत ज्ञानदेव जी महाराज, निर्मल अखाड़ा,स्वामी केशवानंद जी महाराज,स्वामी दिनेशानन्द जी महाराज,आचार्य श्री स्वामी सदाशिवानंद गिरि,म.म.स्वामी अभिषेक चैतन्य जी महाराज,म.म. स्वामी विज्ञानानंद जी महाराज,म.म.स्वामी भगवत स्वरूप जी महाराज,स्वामी शिवानंद जी महाराज,म.म.स्वामी विजयानंद पुरी जी,आचार्य स्वामी सुदर्शन जी ,आचार्य डाॅ.स्वामी हरिहरानद जी महाराज,स्वामी दिनेश दास,स्वामी रघुवंशपुरी जी महाराज,स्वामी विष्णुतीर्थ जी,स्वामी रवि देव शास्त्राी,स्वामी सूर्यदास जी,स्वामी प्रेमानंद जी महाराज,स्वामी ज्ञानानंद जी तथा स्वामी प्रज्ञानन्द पुरी सहित विभिन्न राज्य के आये श्रद्वालुओं के साथ साथ स्वामी तुरीयानंद ट्रस्ट से जु़ड़े सभी पदाध्किारीगण एवं अन्य श्रद्वालु भक्त मौजूद रहें।

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