*शब्दवीणा के “मनभावन सावन” काव्यगोष्ठी में बादल, बारिश, प्रकृति, एवं रक्षाबंधन पर पढ़ी गयीं रचनाएँ*

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*-पतवारों की आदत छोड़ो, तैर के दरिया पार करो*

*-सुनो सहेली सावन आया, मनमोहक मनभावन आया*

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की कर्नाटक प्रदेश समिति के तत्वावधान में आयोजित सावन एवं हरियाली को समर्पित मासिक काव्यगोष्ठी “मनभावन सावन” में देश के विभिन्न प्रदेशों से आमंत्रित रचनाकारों ने सावन, हरियाली, बादल, बारिश, प्रकृति, झूला, रक्षाबंधन, राखी के धागे आदि विषयों पर एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। कार्यक्रम का शुभारंभ शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डॉ सुनीता सैनी गुड्डी द्वारा सुमधुर स्वर में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दवीणा गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दवीणा कर्नाटक प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेंद्र सैनी ने की। काव्यगोष्ठी में अरुण अपेक्षित, दीपक कुमार, अनिल कुमार, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, रमेश चंद्र, अजय कुमार, सरोज कुमार, निगम राज़, विनीता लावणिया, डॉ सुनीता सैनी, डॉ विजयेंद्र सैनी, डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने सावन मनभावन पर रचित गीत, गज़ल, दोहे और मुक्तक प्रस्तुत किए।

सरोज कुमार की रचना “बागों म़े कूके काली-काली कोयलिया जी”, निगम राज़ की “भाई-बहन के संबंधों को लगे दुलारा रक्षाबंधन”, दीपक कुमार की “तुम नदिया बन आन मिलो प्रिय, मैं सागर बन भुज फैलाए”, रमेश चंद्र की “तोड़ जंजीरें दीवारों की अब तो जरा हुंकार भरो। पतवारों की आदत छोड़ो, तैर के दरिया पार करो” एवं अनिल कुमार की “सकल सृष्टि के दाता शंकर” को खूब सराहना मिली। अरुण अपेक्षित, अजय कुमार, जैनेंद्र कुमार मालवीय, डॉ सुनीता सैनी एवं विनीता लावणिया की रचनाओं पर खूब तालियाँ बजीं। डॉ रश्मि के सावन गीत “सुनो सहेली सावन आया, मनमोहक मनभावन आया” ने सबका मन सावनमय कर डाला। कार्यक्रम अध्यक्ष विजयेंद्र सैनी ने सभी की रचनाओं की सारगर्भित समीक्षा की। संचालन डॉ सुनीता सैनी ने किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से हुआ, जिससे पुरुषोत्तम तिवारी, महावीर सिंह वीर, सुरेश विद्यार्थी, प्यारचन्द कुमार मोहन, बबन बदिया, सुनील कुमार उपाध्याय, डॉ विजय शंकर, अनुराग सैनी मुकुंद सहित, डॉ रवि प्रकाश, ललित शंकर, पंकज मिश्र, रजनी गुप्ता, सुषमा सिंह, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, कुमार मनीष, श्रवण सहस्त्रांशु, संतोष कुमार जयंत, सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने काव्यपाठ का आनंद उठाया तथा अपनी टिप्पणियों से रचनाकारों का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।

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