लंपट नहीं संकल्प सुशासन और ईमानदारी के प्रतीक हैं योगी-
जब हम पैदा हुए तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री संपूर्णानंद थे। उत्तर प्रदेश भारत का राजनीतिक दृष्टि से और क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे समृद्ध प्रदेश रहा है। और उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश भी है जो प्रधानमंत्री पद की भूमिका तय करता आया है। पहले 85 और आज भी 80 लोकसभा की सीटें इसी प्रदेश से आती हैं। गोविंद बल्लभ पंत सुचिता कृपलानी चौधरी चरण सिंह कमलापति त्रिपाठी हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वनाथ प्रताप सिंह नारायण दत्त तिवारी राजनाथ सिंह सुश्री मायावती आदि जैसे बड़े-बड़े नेता उत्तर प्रदेश ने दिए हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेता कहलाए। लेकिन शायद नारायण तिवारी के बाद से ही उत्तर प्रदेश की राजनीति क्षेत्रों में और जातियों में बंट गई जिस कारण यह राज्य धीरे-धीरे बीमार होता गया और इसका आपराधिक ग्राफ भी बहुत बढ़ गया। हम जब उत्तर प्रदेश में नौकरी करते थे तो जिस कॉलोनी में रहा करते थे उसे पॉस कॉलोनी अर्थात समृद्ध कॉलोनी आधुनिक कॉलोनी कहा जाता था। सभ्य एवं सुशिक्षित लोगों की कॉलोनी कह जाता था लेकिन वहां की स्थिति भी यह थी कि दिन दहाड़े कब गोली चल जाए या बराबर वाले घर में ही कोई लूटपाट हो जाए। कुछ भी पता नहीं चलता था। शाम के समय सड़कों पर महिलाओं का चलना बहुत असुरक्षित माना जाता था विशेष कर इस बात के लिए भी की कब उनके गले की चेन या कोई गहना बहुत आसानी से लूटा जा सकता है। सब लोगों के भीतर एक भय और असुरक्षा का भाव था। जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत थी।
इसका सारा कारण राजनीतिक था। नालों और गटरों के ढक्कन तक गायब हो जाते थे। राजनीतिक परिदृश्य बदला और योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। कानून व्यवस्था पटरी पर आई उत्तर प्रदेश विकास की ओर पुन: उन्मुख हुआ। अपराधों का ग्राफ बहुत नीचे गिरा। कमियां भी ढेरों हो सकती हैं। लेकिन निश्चित निश्चित निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की हालत में बहुत-बहुत सुधार हुआ है। योगी आदित्यनाथ सौ प्रतिशत ईमानदार व्यक्तित्व के धनी हैं। लाल बहादुर शास्त्री जी जैसा चार कपड़ों में जीवन चल रहा है और उनका अपना पैत्रिक परिवार भी अपनी मेहनत के दम पर रोजगार कारोबार कर रहा है। उनकी सगी भतीजी और भांजी 7000 की नौकरी पाने के लिए रोजगार मेलों के चक्कर लगाती रही हैं। उत्तर प्रदेश जैसे विविध और विशाल प्रदेश का नेतृत्व प्रशासन जितना व्यवस्थित नियंत्रित हो सकता है उतनी योगी आदित्यनाथ की कोशिश है। आज के राजनेताओं में उनके बराबर ईमानदारी का उदाहरण बहुत कम है।
उत्तर प्रदेश में तो मुख्यमंत्री करोड़ों रुपए खर्च करके फिल्म हीरोइनों का डांस कराते रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने यह राशि राज्य के विकास में झोंकी है कानून व्यवस्था के विकास में झोंकी है। योगी आदित्यनाथ के लिए लंपट जैसे शब्दों का उद्बोधन इसी तरह से है जैसे राजा हरिश्चंद्र को कोई चोर कह दे। इस तरह से धूर्ततापूर्ण शब्द हर तरह से पीड़ादायक अशोभनीय और नुकसानदेह होते हैं। पक्ष और विपक्ष में आलोचनाएं स्वाभाविक हैं किंतु निर्मूल वितृष्णा भरे शब्द व्यक्ति के संस्कारों को ही परिलक्षित करते हैं।
इतना भर लिखने का मूल उद्देश्य भी इतना भर है कि ज्ञात हुआ है कि इन शब्दों को उद्धृत करने वाली लड़की उत्तराखंड से संबंध रखती है और उत्तराखंड देवी स्वरूप गंगा जमुना की धरती है जो सारे देश की सांस्कृतिक संवाहिकायें हैं और विश्वभर में भारत को एक अनूठी पहचान दिलाती हैं। हम यहां की समृद्ध सांस्कृतिक धाराओं के लिए काम करते हैं और उत्तराखंड की हर बेटी को गंगा जमुना की प्रतिनिधि मानते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बिना अनर्गल शब्दों के भी की जा सकती है। आज उत्तराखंड में और विशेषकर कुमायूं मंडल में कन्या संक्रांति भी मनाई जा रही है। नेहा बोरा नाम की लड़की का भी बहुत सम्मान है और उत्तराखंडी संस्कृत मर्यादाओं का सभी ध्यान रखें यह भी आशा है
डॉक्टर हरिनारायण जोशी अंजान
