तुलसीदास जयंती : “तुलसी भरोसे राम के, निर्भय होकर सोए”

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तुलसीदास जी के नाम से हम परिचित हैं। श्री राम जी की कथा लिखने वाले संत वाल्मीकि, जिन्होंने त्रेतायुग में इसे संस्कृत में लिखा था, उसी रामायण को इस कलयुग के अंदर आज से चार सौ साल पहले तुलसीदास जी ने फिर से ज़िंदा किया। तुलसीदास जी ने अपने अन्दर भक्ति से श्री राम को प्रकट कियाऔर फिर से “रामचरित्रमानस” संसार को दी उनकी काम वासना से राम वासना जग गयी और श्री राम को प्रकट कर दिया। “हनुमान चालीसा”भी संसार को तुलसीदास जी ने दी है। भक्ति के अंदर श्री राम के मार्ग पर चलते हुए जब उनके अंदर श्री राम प्रकट हुए, तो उन्होंने संसार को कहा कि श्री राम के दास बन जाओ। तभी नाम भी रखा गया तुलसी ‘दास’। जो श्री राम का दास है ,वो सिर्फ़ भक्ति में नहाता है; वो संसार की मोतियों की मालाएँ नहीं माँगता, भीख नहीं माँगता। श्वाँस-श्वाँस में हो सिमरन ‘श्री राम ’का और उस ‘श्री राम ’को प्रकट किया हनुमान जी ने। तुलसीदास जी ने “हनुमान चालीसा”संसार को बताई कि तुम्हें हनुमान होना है, क्योंकि ज़िन्दा श्री राम तो तभी आएँगे जब तुम्हारी श्वॉंस-श्वॉंस में श्री राम होंगे। जब संसार की कोई कंचन, कीर्ति, कामिनी, किसी में इच्छा न हो, तब मनुष्य अंदर से खाली हो जाता है। “तुलसी भरोसे श्री राम के, निर्भय होकर सोए; अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए।”प्यारे तुलसीदासजी इस दोहे में बता रहे हैं कि, “तुलसी भरोसे श्री राम के”। तुलसीदासजी ने कहा कि मेरा भरोसा श्री राम हैं, अब और कोई नहीं बचा; अब जीवन में जो कुछ भी है, श्री राम हैं। श्री राम ही हैं सब कुछ करने वाले। श्री राम केवल धनुष- बाण वाले श्री राम नहीं, बल्कि सत्’ का साक्षात स्वरूप हैं- ‘श्री राम नाम सत् है!’ सत् यानी जिसके अंदर माया नहीं है, जिसके अंदर पूरा खालीपन है, वही है तुम्हारा श्री राम। जैसे इस संसार के अंदर हनुमान जी के लिए श्री राम हुए, या जैसे तुलसीदास जी अपने गुरु नरहरिदास के हनुमान बने, वैसे ही उन्होंने कहा कि मेरा भरोसा अब किसी पर नहीं, सिर्फ मेरे प्रभु प्यारे पर है। “तुलसी भरोसे श्री राम के”, तुम कब कहोगे? तुम हनुमान कब बनोगे? कब श्री राम को प्रकट करोगे? श्री राम तो सदा (रेडी) तैयार हैं आने के लिए, लेकिन तुम अंदर से खाली नहीं हो। तुम्हारी भक्ति पूर्ण नहीं हो रही है; अपनी भक्ति जगाओ, यदि तुम खाली हो जाओ तो श्री राम दौड़े-दौड़े आएँगे! इसीलिए कहा गया है, “तुलसी भरोसे श्री राम के निर्भय होकर सोए”। जिसने सब श्री राम के भरोसे कर दिया, वे निश्चिंत होकर सो जाते हैं। अब जो तुम्हें अच्छा लगे वो करो, क्योंकि अनहोनी होनी नहीं”, होनी हो सो होए” अगर मौत लिखी है, तो आएगी ! जो होना है, वो होने ही वाला है। यदि दिवाला पीटना है तो दिवाला पीटेगा; बर्बादी होनी है तो बर्बादी होगी; मौत लिखी है तो मौत आएगी। क्यों? क्योंकि ये तुम्हारे संचित कर्म हैं। इसलिए जागो प्यारों, जागो! सिर्फ रामायण पढ़ने से कुछ न होगा, अगर रामायण के श्री राम जीवन में न उतरे। यदि तुम काम में ही फँसे रह गए, वासनाओं में अटके रह गए और संसार के मोतियों को ही चुनते रह गए, तो फिर श्री राम न आयेंगे। ज़िन्दा श्री राम को ज़िंदगी में लाना पड़ेगा । तुलसीदास जी ज़िंदा श्री राम को लेकर आए और संसार को “श्री राम चरित्रमानस”दी । कब तुम अपने अन्दर श्री राम को प्रकट करोगे? क्योंकि जो अंदर से हनुमान हो गया, उसी में श्री राम आएँगे। हनुमान जी अंदर से खाली हो गए थे; उनके अंदर से कंचन-कीर्ति-कामिनी गायब हो गई थी। जिसके अंदर से काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार गायब हो गया, वही हनुमान हैं और उन्ही में श्री राम आकर बसते हैं जिनकी श्वॉंस-श्वॉंस में सिर्फ़ एक ही चलता है, इसलिए जागो !
अगर श्री राम को जीवन में नहीं लाए और संसार के कामों में ही फँसे रहे, तो अंत समय में पछताना होगा और कुछ ना होगा, “जब चिड़िया चुग जाएगी ये खेत”, जब तुम मर जाओगे। इसलिए तब तक मौका है, जब तक जीवन बाकी है। तुलसीदास जी के इन शब्दों को अपने अंदर गहराई से उतारो। तुम ज़िंदगी डर में ही जीते हो और डर में ही मर जाते हो। क्यों? डर क्यों है? क्योंकि तुमने अपने को श्री राम के भरोसे अभी नहीं छोड़ा है। जिस दिन श्री राम के भरोसे छोड़ दोगे, सब डर खत्म हो जाएगा। “तुलसी भरोसे श्री राम के निर्भय होकर सोये, अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए”- जो होना है वो होकर रहेगा, इसलिए समझो! ये संतों के वचन हैं। तुलसीदास जी ने जो वचन दिए तुम्हारे लिए, वो उनके हृदय के भाव थे ताकि तुम अपने अंदर हनुमान जी को प्रकट कर सको, भक्ति को जगा सको और श्री राम जी को लाकर तुम इस संसार से मुक्त हो सको। तभी ये जन्म सफल होगा !

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