*शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता “एक शाम, साहित्य के नाम” में साहित्य के उद्देश्य पर बातचीत*
*-आशाओं के पंख लगा हम उड़ने-उड़ाने आये हैं*
*-साहित्य को अध्यात्म एवं समाज सेवा से जोड़ने की है जरूरत*
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा की हरियाणा प्रदेश समिति एवं फरीदाबाद जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता ‘एक शाम साहित्य के नाम’ के अप्रैल अंक का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बतौर आमंत्रित साहित्यकार हरियाणा की कवयित्री एवं इनर व्हील क्लब अॉफ साउथ-वेस्ट कोलकाता की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी सुमन माहेश्वरी रहीं। शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने सुमन माहेश्वरी का शब्दवीणा परिवार की ओर से हार्दिक अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन ‘एक शाम, साहित्य के नाम’ की संचालन प्रभारी कवयित्री रिया अग्रवाल ने एवं संयोजन शब्दवीणा की हरियाणा प्रदेश सचिव सरोज कुमार ने किया।
वार्ताकार रिया अग्रवाल के प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्रीमती माहेश्वरी ने अपने साहित्यिक एवं समाज सेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने अत्यंत प्रेरक रचनाएँ पढ़ीं। कुशल मंच संचालन के लिए आवश्यक बातों पर चर्चा हुई। श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि उन्हें वर्ष 1996 में राष्ट्रपति भवन में काव्य पाठ करने का अवसर प्राप्त हुआ था एवं तत्कालीन भारत की प्रथम महिला श्रीमती विमला शर्मा के हाथों उन्हें सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने अपनी उन खट्टी-मीठी अविस्मरणीय यादों को भी साझा किया। विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं से अपने जुड़ाव एवं उनसे प्राप्त अनुभूतियों एवं सीखों को साझा किया।
श्रीमती माहेश्वरी ने अपने काव्य संग्रह ‘भावों के मोती’ से अपनी रचनाएँ पढ़ीं। उनकी “आशाओं के पंख लगा हम उड़ने-उड़ाने आये हैं। धरती पर उतरेगा स्वर्ग यह विश्वास दिलाने आये हैं। घर-घर में सच्चाई की गीता होगी। हर नारी प्रिय पावनी सीता होगी” सुन कर दर्शकों एवं श्रोताओं से खूब वाहवाहियाँ मिलीं। महिला सशक्तीकरण पर भी उन्होंने प्रशंसनीय रचनाएँ पढ़ीं। श्रीमती माहेश्वरी ने साहित्य के साथ अध्यात्म एवं समाज सेवा को जोड़े जाने पर बल दिया। कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं होना चाहिए। साहित्य का उद्देश्य समाज में नकारात्मकता का अंत करके सकारात्मकता का सृजन करना होना चाहिए। ईर्ष्या-द्वेष जैसी निकृष्ट भावनाओं से ऊपर उठकर समाज के हित में कार्य करने कहा। उन्होंने डॉ रश्मि, श्रीमती सरोज, श्रीमती अग्रवाल के साथ समस्त शब्दवीणा परिवार के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केंद्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर सुरेश विद्यार्थी, दीपक कुमार, बबन बदिया, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, पी. के. मोहन, सरिता कुमार, रश्मि बिनानी, अजय माहेश्वरी, श्रवण सहस्त्रांशु, रमेश चंद्र, अजय कुमार, अनुराग सैनी मुकुंद, आशा साहनी, रचना झा, डॉ विजय शंकर, संतोष कुमार जयंत सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से जुड़े दर्शकों एवं श्रोताओं ने कार्यक्रम का आनंद उठाया। अपनी टिप्पणियों से अपनी भावनाएं एवं प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं।
