*शब्दवीणा के राष्ट्रीय मंच पर “पुस्तक परिचर्चा एवं काव्यगोष्ठी” का हुआ आयोजन*
*-कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वयन डॉ परशुराम तिवारी ने किया*

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की झारखंड प्रदेश समिति एवं देवघर जिला समिति द्वारा शब्दवीणा के राष्ट्रीय परामर्शदाता एवं झारखंड प्रदेश संरक्षक वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर डॉ. रामनंदन सिंह की अध्यक्षता तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी एवं झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ विजय शंकर के निर्देशन में ‘पुस्तक परिचर्चा एवं काव्यगोष्ठी’ आयोजित की गई। प्रथम सत्र में साहित्यिक परिचर्चा के तहत उपस्थित विद्वानों ने शब्दवीणा देवघर जिला सचिव डॉ परशुराम तिवारी द्वारा लिखित उपन्यास ‘मृगतृष्णा’ पर अपने समीक्षात्मक विचार रखे। बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के देवरिया से पधारे सेवानिवृत्त विद्वान शिक्षक राजकिशोर तिवारी एवं सारस्वत अतिथि के रूप में घनश्याम तिवारी की गरिमामय उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत पुष्पमाला, अंगवस्त्र, डॉ परशुराम तिवारी की पुस्तक तथा बाबा वैद्यनाथ और भगवती जगदम्बा की तस्वीर प्रदान करके किया गया। बीज वक्ता के रूप में शब्दवीणा झारखंड प्रदेश प्रवक्ता वरिष्ठ कवि अनिल कुमार झा ने उपन्यास ‘मृगतृष्णा’ में निहित मूल प्रतिपाद्य पर प्रकाश डाला। श्री झा ने कहा कि पुस्तक में मानवीय अनुभूतियों का सुंदर शब्द-चित्रण है, जिसमें उपन्यासकार के संस्कृत शिक्षक होने का व्यक्तिगत प्रभाव भी द्रष्टव्य है। उपस्थित साहित्यकारों ने डॉ परशुराम तिवारी की साहित्यिक सक्रियता एवं ऊर्जा की प्रशंसा की।
पुस्तक परिचर्चा के उपरांत कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्यगोष्ठी का शुभारंभ हुआ जिसमें कवि रविशंकर साह ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। शब्दवीणा की देवघर जिला अध्यक्ष कवयित्री सोनाली भारती एवं जिला साहित्य मंत्री कवयित्री सोनम झा ने अपनी भावनाएँ एवं विचाराभिव्यक्तियाँ साझा कीं। जिला संगठन मंत्री श्रवण कुमार सहस्त्रांशु ने अपनी काव्याभिव्यक्ति से खूब वाहवाहियाँ पायीं। सागर मिश्रा की पंक्ति “सत्य ही कर्म-धर्म, और मर्म मेरा” पर तालियों से सभागार गूंज उठा। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ गद्य-पद्य रचनाकार डॉ शंकर मोहन झा, शिक्षक श्री राजकमल एवं सेवानिवृत्त शिक्षक कैलाश झा ने परशुराम जी ने भी अपने विचार रखे। अपने शिष्य रहे डॉ तिवारी की साहित्यिक रुचि, सक्रियता एवं शालीनता की सराहना की। संगीत और साहित्य जगत से संलग्न सर्वेश्वर दत्त ने युद्ध को मानवता के विरुद्ध ठहराते हुए शक्ति का प्रयोग सकारात्मकता के प्रसार में करने का संदेश दिया। अनिल कुमार झा द्वारा प्रस्तुत “तुलसी बाबा फिर से आओ” सुनकर कुछ देर के लिए सभी श्रीराम भक्ति में डूब गये।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डॉ. रामनंदन सिंह ने डॉ परशुराम तिवारी को हार्दिक बधाइयाँ और मंगलकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं युवाओं को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता है। उनमें सृजनात्मकता का विकास करने की जरूरत है। इस दिशा शब्दवीणा द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं । यह शब्दवीणा परिवार के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश अध्यक्ष डॉ विजय शंकर ने किया। डॉ शंकर ने शब्दवीणा की देवघर जिला समिति के साथ गोड्डा, राँची, जमशेदपुर, पाकुड़ जिला समितियों द्वारा भी साहित्यिक गोष्ठियों करवाने के लिए इच्छा प्रकट की। कार्यक्रम के संयोजक एवं समन्वयक डॉ परशुराम तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सम्मानित सभी अतिथियों एवं समस्त शब्दवीणा परिवार के प्रति हार्दिक कृतज्ञता जताई। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केंद्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी, पी के. मोहन, बबन बदिया, अरुण कुमार यादव, रामनाथ बेखबर, डॉ वीरेंद्र कुमार, सरिता कुमार सहित अन्य साहित्यानुरागियों ने कार्यक्रम का आनंद उठाया।
