*जीबीएम कॉलेज की एनएनएस स्वयंसेवकों ने एमयू परिसर में किया पौधरोपण*

0

*-कॉलेज की एनएसएस इकाई 5 जून से 4 जुलाई तक विश्व पर्यावरण माह के तहत सीड बॉल्स द्वारा करेगी पौधरोपण*


गया जी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गौतम बुद्ध महिला कॉलेज की एनएसएस स्वयंसेवक वैष्णवी कुमारी, अंजली मिश्रा, कशिश सिंह, अंजली कुमारी, श्रुति वर्मा, अनीषा कुमारी, गीतांजलि, सिमरन, व अन्य ने मगध विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित प्रभात फेरी एवं पौधरोपण कार्यक्रम में बढ़चढ़कर भाग लिया। एनएसएस स्वयंसेवकों ने मिलजुलकर मगध विश्वविद्यालय, परिसर में आम, अमरूद, लीची, जामुन, आदि के फलदार वृक्षों के पौधे लगाए। प्रभात फेरी में “एक पेड़, एक जीवन”, “जल बचाओ, जीवन बचाओ”, “स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ भविष्य”, “प्रकृति से प्रेरणा, जलवायु के लिए समाधान” जैसे नारे लगाकर स्वयंसेवकों ने समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित भी किया।

जीबीएम कॉलेज की एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल से प्राप्त निर्देशानुसार, महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा 5 जून से 4 जुलाई तक “विश्व पर्यावरण माह-सह-पौधारोपण अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके तहत कॉलेज की स्वयंसेवक फलों के बीजों को गोबर तथा मिट्टी में लपेट कर सीड बॉल्स बनाएंगी। डीएफओ एवं वन विभाग के संबंधित अधिकारियों से अनुमति प्राप्त करके छात्राएँ उपजाऊ खाली पड़े स्थानों पर जैसे सीताकुंड, गायत्री घाट, ब्राह्मणी घाट, आजाद पार्क, गाँधी मैदान परिसर में, सीड बॉल्स फेंककर पेलेटिंग द्वारा पौधरोपण अभियान का हिस्सा बनेंगी।

सीड बॉल्स द्वारा पौधरोपण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए डॉ रश्मि ने बतलाया कि बीजों को गोबर और मिट्टी में मिलाकर फेंकने की इस प्रक्रिया को “सीड बॉल मेकिंग”, “सीड बॉम्बिंग” या “पेलेटिंग” कहा जाता है। गुरिल्ला गार्डेनिंग स्टाइल में सीड बॉल्स अथवा बीज गोलों द्वारा पौधारोपण की प्रक्रिया वनों की कटाई रोकने और अनुर्वर ज़मीन पर हरियाली लाने का एक सरल, सुलभ और सफल पारंपरिक तरीका है। गोबर और मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व बीजों को ऊर्जस्वित रखने में सहायक होते हैं, जिससे बारिश होने पर सीड बॉल्स में संरक्षित पौधे आसानी से स्वतः अंकुरित हो जाते हैं।

प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल के निर्देशानुसार, एनएसएस इकाई की सभी स्वयंसेवकों को इस संबंध में सूचना दे दी गई है। छात्राएँ अपने घरों में फल के बीजों को एकत्र करके उनपर गोबर और मिट्टी की परत चढ़ाकर सीड बॉल्स बनाकर बरसात प्रारंभ होने तक पक्षियों, चूहों और कीड़ों से बचाकर रखेंगी। बारिश होने के उपरांत उन सीड बॉल्स को खाली पड़ी ज़मीन, सड़क के किनारों, या पहाड़ी स्थानों, खेतों आदि में फेंकने का अभियान चलाया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share