इस फ्रेंडशिप डे पर बदलें अपनी दोस्ती की परिभाषा
दोस्ती का दिन. संसार में कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जो यह कहे कि मेरा कभी कोई दोस्त नहीं हुआ। पर ये दोस्त क्या है? अगर संसार में कोई भी दिन मनाया जाता है, तो उसका कहीं ना कहीं बहुत बड़ा महत्व होता है। दोस्त,आखिर है कौन? दोस्त की क्या परिभाषा दी गई है? सच्चा दोस्त वो होता है जो ज़रूरत के समय काम आता है। सच शब्द आते ही ‘सत्य’भी आ जाता है और सत्य के आते ही दोस्त की परिभाषा बदल जाती है। वो फिर केवल दोस्त नहीं रह जाता, वो ‘मित्र’ हो जाता है। दोस्त और मित्र में क्या फर्क है? एक शब्द वह है जो माया ने दिया और उसका अर्थ भी मायावी ही रहा। दूसरा एक आध्यात्मिक अर्थ है, जो संसार में किसी अध्यात्म को उपलब्ध व्यक्ति ने दिया, मतलब जिसने भी सत्य का अनुभव किया, उसने दिया। मित्र यानी वो दोस्त जिसने कि तुम्हारी उस ‘मैं’ को, ‘मी’ (me) को मिटा दिया और ‘मी’का त्राण कर दिया। देखो, शब्द में भी ‘मि’ और ‘त्र’ है, तो जो ‘मी’ का त्राण करवा दे, वह मित्र है। अगर दोस्ती माँग के साथ जुड़ी है, तो वह सच्चा दोस्त नहीं है। सच्चा दोस्त कौन है? जितने भी लोग भगवता को उपलब्ध हुए, उनके साथ जो भी लोग जुड़े थे, वो उनके मित्र थे। मित्र संसार में कभी-कभी कोई विरले ही पैदा होते हैं। जैसे कि श्री राम के साथ हनुमान जी सच्चे मित्र हो गए। कहा भी गया है “गुरु मात पिता बंधु सखा”। वो गुरु भी हुए और मित्र भी। श्री कृष्ण के साथ अर्जुन सखा हुए; श्री कृष्ण ने अर्जुन के साथ जो रिश्ता निभाया, वो थी सच्ची मित्रता। मीराबाई के लिए संत रविदास सच्चे मित्र थे और विवेकानंद के लिए रामकृष्ण परम हंस सच्चे मित्र थे। ये सिर्फ भगवता में होता है,और सिर्फ सत् से आता है। परमात्मा क्या है? तुम्हारी चेतना का परम विकास! जिस दिन तुम सच्चे मित्र हो गए, तुम ही परमात्मा हो गए। दूसरे शब्दों में, तुम्हारे मरे हुए शरीर को दोस्त की ज़रूरत है, लेकिन तुम्हारे अंदर की चेतना को मित्र की ज़रूरत है। और जब मित्र मिल जाता है तो मैत्री आती है। मैत्री क्या है? जब सर्व से प्रेम हो जाता है।
इसलिए कहा गया, कि सच्चे मित्र को खोजो। जब सच्चा मित्र मिलेगा तो वो तुम्हारी दोस्ती को मित्रता में बदल देगा। दोस्त को मित्र बनना है,पर कैसे? जब तुम किसी मित्र को ढूँढ लेते हो, जिसके अंदर ‘मी’(me) और ‘मैं, मेरा’का त्राण हो गया हो, वो तुम्हारे को सच्ची दोस्ती करवाएगा। तुमको अपना सच्चा दोस्त बनाएगा, इसलिए तुमको सच्चा मित्र केवल भगवता के माध्यम से ही मिल सकता है, इस मृत्यु लोक से नहीं। इस इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे पर तुम्हें अपनी दोस्ती को मित्रता में बदलना है। मित्र की संगति भी जन्मों के बाद मिलती है और जब मित्र का संग मिलता है, तो फिर दोस्त छूटने लगते हैं। फिर तुम ये नहीं कहोगे कि ये मेरा सच्चा दोस्त है। सच्चा दोस्त खत्म हो जाता है। फिर सर्व में वो एक को ही देखता है। इसलिए आज के इस दिन अगर तुम अपने अंदर के उस दोस्त को बाहर कर दो और मित्र को जगह दे दो, तो तुम्हारे जीवन में क्रांति आ जाएगी। फिर सच्चा इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे होगा। क्योंकि आज मैं जाग गया, आज पूरा संसार मुझे मेरा मित्र नज़र आने लगा, अब तो सारा संसार ही मेरा दोस्त हो गया। “ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर”- खेल खत्म। दोस्त माया है, मित्र ब्रह्म है। उम्मीद है कि तुम सारे कहीं ना कहीं दोस्त तो हो ही, अब इस दोस्ती से उस मित्रता की ओर बढ़ोगे और सच्चा दोस्त खोजोगे, जो तुम्हारे अंदर मित्रता के लक्षण लेकर आएगा।और मित्र हो जाना ही मुक्ति है।आज फ्रेंडशिप डे है, तो आज दृढ़ संकल्प लो कि मुझे मित्र होना है। दोस्त होकर मरे तो जन्म-मरण में आना पड़ेगा, मित्र होकर मरे तो मुक्ति मिलेगी और तुम्हारा ये जन्म सफल होगा।
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