रूमी: प्रेम की शराब में डूबा हुआ ज़िंदा ग्रंथ

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रूमी के जीवन से सीखें “अपने घर लौटने” की कला

रूमी सूफीवाद के महान संत, कोहिनूर हैं क्योंकि उन्होंने प्रेम से भक्ति को नाच-नाच कर प्रकट कर दिया। प्रेम का बीज भक्ति में पूरा खिल गया। सूफीवाद में रूमी ने चार चाँद लगा दिए, वो पूरी तरह से खिल गए, गंभीरता को पूरा का पूरा प्रेम में बदल दिया, चहचहा गए। उनको इतनी मस्ती आई, इतनी मस्ती आई कि आखिरी में मस्ती भी थक गई! क्योंकि जब कोई प्रेम में परिपूर्णता को उपलब्ध होता है, तो पूरा ब्रह्मांड उससे जुड़ जाता है और पूरी रचना, उसके पार वो रचयिता, उन सबसे कनेक्शन जुड़ जाता है। संसार को ज़िंदा ग्रंथ मिलता है, जिंदा ग्रंथ! याद रखना धर्म को कभी-कभी कोई विरले लोग उपलब्ध होते हैं। धर्म क्या है? धर्म का अर्थ होता है- भक्ति। धर्म कोई हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध नहीं है, ये उपधर्म हैं! धर्म नहीं हैं। ब्रह्म से हम सब ने जन्म लिया है, और हम ब्रह्म की ही बूँद हैं पर हम भाप नहीं बन सके, यानी हमारा प्रेम भक्ति को उपलब्ध नहीं हो सका इसलिए हम इस संसार में फिर से गिर गए, फेल हो गए। इस संसार में सब फेलियर ही पैदा होते हैं! तुम ये मत कहना कि मैं पास हो गया! ये तो बस संसार में यानी माया में तुम पास होते हो। इसलिए जीसस ने कहा कि “इस संसार में जो आगे अव्वल आने के लिए दौड़ेगा, वो मेरे पिता के राज्य में सबसे पीछे खड़ा होगा।“आखिरी यानी पेड़, पहाड़, कीड़ा, मकोड़ा बनकर खड़ा होगा। इसलिए इस जीवन के बारे में जो सोच है उसको तुमने जानना है। ये सोच क्या है? ये सोच जिन्होंने दी, उनको हमने दरवेश कहा, संत और भगवान कहा है। अगर तुम समझ लो कि जीवन क्या है, तो तुम्हारी ज़िंदगी सफल हो जाएगी।
रूमी वो खिला हुआ फूल हैं जो संसार के आगे जब प्रकट हुआ, तो लोग बावले हो गए, पागल हो गए! पर लोगों ने उनको बाहर से ही समझा, अंदर से नहीं। बाहर मतलब बहिर्मुखी! प्रेम को संसार बाहर से ही देखता है। प्रेम करने वाला जब एक बार प्रेम की शराब पी लेता है, तो उसके जीवन में आनंद आ जाता है, वो भगवान हो जाता है जबकि संसार की शराब पीकर लोग शैतान हो जाते हैं। रूमी ने परमात्मा की शराब पी ली और बावले हो गए। ऐसे बावले हुए कि इस संसार के अंदर एक नया ग्रंथ बना, रूमी का ग्रंथ! रूमी की वाणी को आज पूरी दुनिया पसंद करती है। याद रखना कि इस संसार में कुछ ऐसा करके जाओ कि दुनिया तुम्हें भी पसंद करे। क्योंकि इस संसार में जब भी कोई फूल खिलता है तो वो उस ब्रह्मांड की, उस शराब की ही बात करता है। बस अपने अंदर उस परमात्मा को पी लो, “नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात।” वो शराब रूमी ने पी ली, अपने सतगुरु को अंदर बिठा लिया और रूमी संसार में गुरु के संग प्रकट हो गए। इसलिए इस बार अपने अंदर ऐसा दृढ़ संकल्प लो कि अपने घर लौटना है। अगर अंदर से दृढ़ निश्चय करोगे तो ही माया के रस से छूटकर ब्रह्मरस में आओगे और ये यात्रा सफल होगी।

MAAsterG गारंटी देते हैं की ३-३० लेक्चर सुनने से ही आपको अपने जीवन में परिवर्तन दिखेगा।

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