*-छात्राओं ने रेखाचित्र ‘गौरा’, ‘सोना’, एवं ‘गिल्लू’ का किया सस्वर पाठ, हुई विश्लेषणात्मक परिचर्चा*
*शब्दवीणा सृजन त्रिविधा का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक महादेवी वर्मा जी को रहा समर्पित*
*शिक्षिकाओं एवं महिला साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं महादेवी वर्मा जी*
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा आयोजित साहित्य की गद्य, पद्य, एवं, नाटक विधाओं पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम “शब्दवीणा सृजन त्रिविधा” का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री महादेवी वर्मा जी को समर्पित रहा। कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। संचालन शब्दवीणा सृजन त्रिविधा प्रभारी हरियाणा की कवयित्री कीर्ति यादव ने किया। श्रीमती कीर्ति ने स्वरचित सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के उपरांत महादेवी वर्मा की जीवनी एवं साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ रश्मि ने महादेवी वर्मा जी के आध्यात्मिक भावों से भरे गीत “क्या पूजन क्या अर्चन रे” गाकर सुनाया। छायावाद के चार मूल स्तंभों मे से एक तथा आधुनिक युग की मीराबाई के नाम से विख्यात महादेवी वर्मा को डॉ रश्मि ने महिलाओं, विशेष रूप से शिक्षिकाओं एवं महिला साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत बतलाया। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में महादेवी वर्मा जी के महत्वपूर्ण योगदान को स्त्रियों के लिए अनुकरणीय बतलाया। कार्यक्रम में आमंत्रित छात्रा निधि कुमारी, शैली पाठक, एवं हर्षिता मिश्रा ने अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए महादेवी वर्मा जी के रेखाचित्र-संग्रह ‘मेरा परिवार’ में संकलित चर्चित व मर्मस्पर्शी रेखाचित्रों, क्रमशः गौरा (गाय), सोना (हिरण), एवं गिल्लू (गिलहरी) का सस्वर पाठ किया।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे जुड़कर जैनेन्द्र कुमार मालवीय, पंकज मिश्रा, प्यारचन्द कुमार मोहन, डॉ विजय शंकर, निगम राज़, ललित शंकर, मधु वशिष्ठ, प्रवीण गुलाटी, सोनल बादल, टुन्नू दांगी, सरिता कुमार, डॉ रवि प्रकाश सहित देश के विभिन्न भागों से जुड़े संवेदनशील साहित्यप्रेमियों ने रेखाचित्रों का श्रवण किया तथा अपनी टिप्पणियों द्वारा छात्राओं का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम में प्रस्तुत तीनों रेखाचित्रों में निहित मर्मस्पर्शी विषयवस्तु, जीवंत भाषा शैली, सजीव चरित्र चित्रण, महादेवी वर्मा की संस्कृतनिष्ठ लेखन शैली, विचारणीय तथ्यों, आध्यात्मिक मूल्यों, एवं बुद्धवाद से प्रभावित मानवीय संदेशों पर विश्लेषात्मक परिचर्चा हुई।
निजी स्वार्थ व धनलाभ के लिए ईर्ष्यावश दूध दूहने आने वाले ग्वाले द्वारा महादेवी जी की गाय “गौरा” को गुड़ में सूई डाल कर खिलाकर हत्या कर डालने के दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंग द्वारा मानवों की पशु-पक्षियों के प्रति बरती जाने वाली क्रूरता एवं अमानवीयता पर बातचीत हुई। हिरण शावक “सोना” की माता की शिकारी द्वारा की गई निर्मम हत्या, सोना के पालन-पोषण, माली द्वारा रस्सी से बांध दी गई सोना की अकाल मृत्यु, महादेवी वर्मा का गिल्लू गिलहरी से आत्मिक जुड़ाव एवं गिल्लू की मृत्यु से उत्पन्न दुख पर विचार रखे गए। डॉ रश्मि ने महात्मा बुद्ध द्वारा घायल हंस की रक्षा किए जाने का प्रसंग तथा जॉर्ज अॉरवेल की प्रसिद्ध रचना “एनिमल फॉर्म” में वर्णित समस्याओं का संदर्भ लाते हुए मनुष्य द्वारा जीव-जंतुओं पर किए जा रहे अत्याचार को निंदनीय ठहराया। मानव जाति द्वारा निरीह व निर्दोष जीव-जंतुओं, प्रकृति व पर्यावरण के साथ किए जा रहे अत्याचारों को रोकने के लिए युवतियों और महिलाओं को आगे आने कहा।
