नौ जून को श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में होगा ‘यूथ फॉर टुमॉरो’ प्रेरणात्मक संगोष्ठी का आयोजन

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युवा शक्ति ही विकसित भारत की आधारशिला : डॉ. भगवन नौटियाल

उत्तरकाशी। युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने तथा उनके समक्ष उपस्थित अवसरों एवं चुनौतियों पर गंभीर विमर्श के उद्देश्य से श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी में नौ जून को ‘यूथ फॉर टुमॉरो’ विषयक विशेष प्रेरणात्मक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी का मुख्य विषय “राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की भूमिका तथा युवाओं के लिए अवसर एवं चुनौतियां” निर्धारित किया गया है।समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में सिद्धि जौहरी (सिद्धि सोमानी जौहरी) रहेंगी। जो कि एक प्रसिद्ध मॉडल, सोशल एक्टिविस्ट और मिसेज इंडिया इंटरनेशनल व मिसेज गैलेक्सी क्वीन इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिताओं की विजेता हैं। वे केवल फैशन और ग्लैमर की दुनिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक योग्य क्लिनिकल बायोकैमिस्ट (गोल्ड मेडलिस्ट), उद्यमी और समाजसेविका भी हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवान नौटियाल ने कहा कि ‘यूथ फॉर टुमॉरो’ की अवधारणा भविष्य के भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका को केंद्र में रखकर विकसित की गई है। आज का युग ज्ञान, कौशल, तकनीक और नवाचार का युग है। ऐसे समय में युवाओं को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहकर नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता, उद्यमिता और रचनात्मक चिंतन को भी विकसित करना होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग के समक्ष असीम संभावनाओं के साथ अनेक चुनौतियां भी विद्यमान हैं। डिजिटल युग में सूचना के व्यापक प्रसार ने अवसरों के नए द्वार खोले हैं, वहीं प्रतिस्पर्धा, मूल्य-संकट और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषय भी गंभीर चिंतन की अपेक्षा करते हैं। यह संगोष्ठी युवाओं को इन सभी आयामों पर विचार करने तथा अपने व्यक्तित्व और भविष्य को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगी।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. हरिशंकर नौटियाल ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और अमूल्य धरोहर होते हैं। उनके विचार, ऊर्जा, नवाचार तथा कर्मनिष्ठा ही राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व के सर्वाधिक युवा देशों में से एक है। ऐसे में युवाओं की प्रतिभा, कौशल और सृजनात्मक क्षमता को उचित दिशा प्रदान करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि युवा वर्ग सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़े तो विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न शीघ्र साकार हो सकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण करना है जो समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। विश्वविद्यालय इसी ध्येय को लेकर युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से शिक्षाविद, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, नवाचारी शिक्षक, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व विकास, व्यक्तित्व संवर्धन, कौशल विकास, नवाचार, स्वरोजगार तथा सामाजिक दायित्व जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं युवा वर्ग से इस महत्वपूर्ण आयोजन में सहभागिता कर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण हेतु अपने विचारों और अनुभवों से योगदान देने का आह्वान किया है।

“युवा केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान के परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ता हैं। उनके विचारों में राष्ट्र का कल और उनके संकल्पों में भारत का स्वर्णिम भविष्य निहित है।”।

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