समर कैम्प में गूंजी कौरवी बोली की मिठास, बच्चों ने सुने फायकू और आयकू के स्वर

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Thesoulofindia, Belwal
लोकभाषा, साहित्य और संस्कृति के संगम से सराबोर रहा समर कैम्प का दूसरा दिन

दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह तथा दिव्य गंगा सेवा मिशन के राष्ट्रीय समन्वयक एवं समूह सम्पादक डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय की साहित्यिक उपस्थिति से राजकीय प्राथमिक विद्यालय बेडपुर, रुड़की में संचालित समर कैम्प का दूसरा दिन विशेष रूप से प्रेरणादायी एवं स्मरणीय बन गया। समर कैम्प में भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति का ऐसा आत्मीय संगम देखने को मिला, जिसने बच्चों के मन में अपनी मातृभाषा और लोकपरंपराओं के प्रति नवीन उत्साह का संचार किया।

मुख्य अतिथि डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभाषाएँ और लोकबोलियाँ किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला होती हैं। कौरवी बोली केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि लोकजीवन की जीवंत धड़कन है, जिसमें गांव की मिट्टी की सोंधी सुगंध, रिश्तों की आत्मीयता और भारतीय लोकसंस्कारों की गरिमा रची-बसी है। उन्होंने बच्चों को अनेक कौरवी शब्द, लोक अभिव्यक्तियाँ एवं बोलचाल के उदाहरण सुनाए, जिन्हें बच्चों ने अत्यंत उत्साह के साथ दोहराया। विद्यालय परिसर देर तक कौरवी बोली की मधुर ध्वनियों से गूंजता रहा।

इस अवसर पर डॉ. पाण्डेय ने हिन्दी साहित्य की नवीन विधाओं ‘फायकू’ एवं ‘आयकू’ पर भी विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य समय के साथ निरंतर नए प्रयोगों से समृद्ध होता है और यही प्रयोग नई पीढ़ी को रचनात्मक अभिव्यक्ति की ओर प्रेरित करते हैं। बच्चों को सरल, सहज एवं रोचक शैली में चुनिंदा फायकू सुनाते हुए उन्होंने साहित्य के प्रति जिज्ञासा, संवेदना और सृजनशीलता जागृत करने का प्रयास किया। बच्चों की उत्सुकता, मुस्कान और सहभागिता ने पूरे वातावरण को साहित्यिक उल्लास से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाध्यापक मुफ्ती इकराम ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी भाषा, लोकसंस्कृति और साहित्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा आधारित शिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है तथा इस प्रकार के शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन सहायक अध्यापक डॉ. संजय वत्स ने किया। सहायक अध्यापक श्रीमती सुमन एवं नीतिन कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति से आत्मीय जुड़ाव बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

समर कैम्प का यह दिन बच्चों के लिए मात्र एक शैक्षिक गतिविधि बनकर नहीं रहा, बल्कि लोकभाषा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का एक जीवंत एवं प्रेरणादायी अवसर सिद्ध हुआ। विद्यालय परिसर बच्चों की उत्साहित मुस्कानों, साहित्यिक संवादों और कौरवी बोली की मिठास से देर तक आलोकित बना रहा।

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