टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम एडीएम को सौंपा ज्ञापन

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हरिद्वार। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, जनपद हरिद्वार के तत्वावधान में शुक्रवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने, आरटीई अधिनियम-2009 एवं एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग को लेकर जिलेभर के प्राथमिक शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेन्द्र कुमार को सौंपकर केंद्र सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

जिले के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे हजारों शिक्षक दोपहर में विकास भवन परिसर में एकत्र हुए। यहां आयोजित सभा के बाद शिक्षक हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की और सरकार से वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की मांग उठाई।

सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा तथा जिला मंत्री हेमेन्द्र चौहान ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद वर्षों से कार्यरत हजारों शिक्षक असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति आरटीई अधिनियम-2009 एवं एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पहले विधिवत चयन प्रक्रिया के माध्यम से हो चुकी थी, उन पर बाद में लागू हुई टीईटी की अनिवार्यता थोपना प्राकृतिक न्याय, वैध अपेक्षा और समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने नियुक्ति के समय लागू सभी नियमों एवं शैक्षिक योग्यताओं को पूरा करते हुए वर्षों से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है। उनके अनुभव, सेवा-समर्पण और कार्यकुशलता को केवल टीईटी के आधार पर संदेह के दायरे में नहीं रखा जा सकता। ऐसे शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान करना न्यायसंगत एवं व्यावहारिक निर्णय होगा।

उन्होंने कहा कि संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार से मांग की है कि आरटीई अधिनियम-2009 एवं एनसीटीई की अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने हेतु आवश्यक नीतिगत एवं विधिक पहल की जाए। साथ ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के माध्यम से आवश्यक संशोधन अथवा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि देशभर के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के साथ समान एवं न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित हो सके।

संयुक्त वक्तव्य में यह भी मांग की गई कि देशभर के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली के लिए भी केंद्र सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय ले।

अपर जिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार ने शिक्षकों का ज्ञापन प्राप्त कर उसे प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक प्रेषित कराने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला महामंत्री हेमेन्द्र चौहान, जिला कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा, राजीव शर्मा, मुकेश चौहान, मनमोहन, पंकज बिश्नोई, अनिल चमोली, केहर सिंह, प्रवीण कुमार, कुलदीप, बबलू अधाना, विकास शर्मा, सुखबीर सैनी, प्रविंद्र, आलोक शर्मा, इकबाल अहमद, शालिनी गोस्वामी, नूपुर शर्मा, अँजेश, वीर सिंह, अमरीष वर्मा, ईश्वर सिंह, कविता शर्मा, सरिता त्यागी, प्रतिभा सैनी सहित जिले के विभिन्न ब्लॉकों से बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत देने तथा अन्य मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो संगठन प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन को और व्यापक रूप देगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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