पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने लगाए फूल फरौशी ठेकों में अनियमितताओं के आरोप, एक ही परिवार को लाभ देने के लिए वित्तीय और तकनीकी बिड में देरी की गयी
वर्ष 2010 से वर्तमान तक सभी ठेकों की जांच और संबंधित ठेकदारों से राजस्व नुकसान की भरपाई की मांग की
हरिद्वार। पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने नगर निगम के फूल फरौशी के ठेकों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए वर्ष 2010 से वर्तमान तक सभी ठेकों की जांच कर संबंधित ठेकेदारों से वसूली तथा निगम के राजस्व को हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व पार्षद कैलाश भट्ट ने नगर निगम द्वारा मालवीय द्वीप, घंटाघर सहित अन्य स्थानों पर फूल फरौशी के ठेके आवंटित किए जाते हैं। आरोप लगाया कि वर्ष 2010 से अब तक के फूल फरौशी ठेकों की प्रक्रिया और उससे प्राप्त राजस्व का स्पष्ट रिकॉर्ड सूचना के अधिकार के तहत उत्तराखंड सूचना आयोग तक मामला पहुंचाए जाने के बावजूद अपेक्षित जानकारी नहीं दी गयी।
कैलाश भट्ट ने वर्ष 2026 में ठेकों की अवधि समाप्त होने के बाद अपनाई गई ई-निविदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने 7 मई 2026 को ई-निविदा आमंत्रित की और 28 मई को निविदाओं के संबंध में जानकारी दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद तकनीकी एवं वित्तीय बिड खोलने में देरी हुई तथा अधिकारियों को कई बार पत्र देने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। 19 जून 2026 को वित्तीय और तकनीकी बिड खोली गईं, जिनमें कुछ टेंडर दो-दो बिड के साथ पाए गए। आरोप लगाया कि करीब 22 दिनों तक बिड नहीं खोली गई, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
पत्रकार के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जब वह स्वयं निगम में पार्षद थे उन्हें इन सब बातों का पता नहीं चला की यहाँ इतनी गड़बड़ी है, अंधा बांटे रेवड़ी अपनों अपनों को देवे वाला हिसाब चल रहा है, एक ही परिवार को लगातार लाभ देने का कृत्य किया जा रहा है, उन्होंने वर्तमान पार्षद चौधरी का नाम लेते हुए यह सब कहा,
श्री भट्ट ने आरोप लगाया कि पूर्व में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ठेके नहीं खोले गए। आरोप है कि कुछ मामलों में ठेकेदारों द्वारा निर्धारित राशि जमा नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें ठेका दिए जाने की स्थिति बनी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में जहां ठेकेदारों को निर्धारित धनराशि का 25 प्रतिशत जमा करना होता था, वहीं बाद में नगर निगम द्वारा 40 प्रतिशत तथा चार माह की संपूर्ण धनराशि जमा करने का नियम बनाया गया। भट्ट ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदार अलग-अलग नामों से ठेके लेकर प्रक्रिया में भाग लेते रहे हैं। इसके चलते वर्ष 2010 से वर्तमान तक फूल-फरौशी के ठेकों की विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने अत्यधिक भीड़ वाले समय में ठेकेदारों द्वारा ठेके के बाहर खोखे और दुकानें लगाकर नगर निगम को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया और मांग की कि निर्धारित स्थल के अतिरिक्त कहीं भी फूलों की बिक्री न हो और ठेकेदारों द्वारा किसी प्रकार का अतिक्रमण न किया जाए। पत्रकारवार्ता में पार्षद हिमांशु गुप्ता, ऋषभ वशिष्ठ, शिवम गिरी, तरूण व्यास, शुभम जोशी, अनिकेत गिरी, शानू गिरी मौजूद रहे।
