कांवड़ यात्रा में देवी देवताओं का भेष धर नृत्य ना करें, हम बर्दाश्त नहीं करेंगे :पं. अधीर कौशिक

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श्री अखंड परशुराम अखाड़े ने कावंड़ियों से की नियमों का पालन करने की अपील

हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े ने कांवड़ लेने आने वाले श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील की है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के आरम्भ में भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने काँवड़ यात्रा के आचार व्यवहार, नियम धर्म पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि काँवड़ यात्रा बहुत पवित्र और संयमित यात्रा है जो शिव पार्वती को प्रसन्न करने वाली है इसमें हुड़दंग और नशे का कोई प्रयोग उपयोग वर्जित है, अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि कांवड़ मेला दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा है। कांवड़ लेने आने वाले सभी शिवभक्त नियमों का पालन करते हुए ही कावंड़ उठाएं। कांवड़ लाने के लिए घर से चलते समय बहन से मंगल तिलक कराए और बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें। जिस उद्देश्य के लिए कांवड़ उठायी है। उसका स्मरण करते रहें। किसी भी प्रकार का नशा ना करें। डीजे पर फिल्मी गानों की धुन पर देवी देवताओं की वेशभूषा में नृत्य ना करें। कांवड़ यात्रा के दौरान नाश्ता और भोजन करने के बाद हाथ पैर धोयें। किसी भण्डारे में प्रसाद ग्रहण किया है तो वहां कुछ ना कुछ दान अवश्य दें। गुलर के पेड़ के नीचे से कांवड़ ना निकालें। जलाभिषेक करने के बाद घर पहुंचने पर बहन को नेग दें और सत्यनारायण भगवान की कथा करें। पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि शिवभक्तों को जागरूक करने के लिए अखाड़ा अभियान भी चलाएगा। वार्ता में महंत कीर्ति गिरी, डा.दिनेश आचार्य, विष्णु शर्मा आदि ने भी काँवड़ के विषय में अपने विचार रखे।

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