युद्ध कौशल के प्रतीक ठोड़ा नृत्य के साथ हिमाचली नाटी से बिस्सू मेले का परंपरागत जश्न मनाया

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महासू मंदिर पहुंचे कारसेवक,बिस्सू मेले का परंपरागत जश्न मनाया
देहरादून। हिमाचल के सीमावर्ती ग्रामीण इलाके से सैकड़ों लोग ढोल बाजे के साथ बिस्सू लेकर प्रसिद्ध महासू मंदिर हनोल पहुंचे।
हिमाचल से आए देवता के कार सेवक (बारबिशिया) सदियों पुरानी देव परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। बारबिशियों ने पाषाणकालीन युद्ध कौशल के प्रतीक ठोड़ा नृत्य के साथ हिमाचली नाटी से बिस्सू मेले का परंपरागत जश्न मनाया।
पड़ोसी राज्य हिमाचल के सीमावर्ती ग्राम टेलर, थंगाड, कुडोग, रमदाडा, काशक, सावरा, थितरोली, मानगढ, मणवेटी, थमाडा, भंगेटी समेत 12 गांवों के लोग प्रतिवर्ष अप्रैल माह में बिस्सू मेले का परंपरागत जश्न मनाने व रात्रि जागरण को देवता के दरबार में आते हैं।
हिमाचल के सीमांत इलाके में बसे देवता के कार सेवक जिन्हें बारबिशिया कहते हैं शुक्रवार को ढोल बाजे के साथ हनोल मंदिर पहुंचे।
मंदिर प्रबंधन समिति ने कारसेवकों का परंपरागत तरीके से स्वागत किया। बारबिशिया कार सेवकों ने मंदिर में पूजा दर्शन के बाद हिमाचली नाटी व लोकनृत्य से समा बांधा।बारिबिशिया भक्तों के साथ बिस्सू मेले का लोक उत्सव मनाने पहुंची ग्रामीण महिलाओं व पुरुषों ने सामूहिक रुप से लोक नृत्य की प्रस्तुति से देवता की स्तुति की।
कारसेवकों ने पाषाणकालीन युद्ध कौशल के प्रतीक ठोड़ा नृत्य का प्रदर्शन कर समाज की नई पीढ़ी को पुरातन संस्कृति की विशेषता बताई।
लोक मान्यता एवं परंपरा के अनुसार बैसाख में बारबिशिया कार सेवक बिस्सू मनाने हनोल मंदिर में जमा होते है। करीब दो हजार कारसेवक एवं श्रद्धालुओं ने बिस्सू के लोक उत्सव में देवता के दर्शन कर खुशहाली की कामना की।
भक्तों की सुविधा को मंदिर प्रबंधन समिति हनोल द्वारा संचालित लंगर हाल में सभी श्रद्धालुओं को भंडारे में प्रसाद वितरण किया गया।
इस मौके पर स्याणा मोहन सिंह, प्रबंधक नरेंद्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम सिंह राजगुरु, भागमल चौहान, मातबर सिंह, सूरत सिंह, रणसिंह, केशर सिंह, नितेश, सुरेश, ओमप्रकाश चौहान, रामलाल चौहान, बलवीर चौहान आदि मौजूद रहे।

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