विकास के बीच सुलगता युवाओं का भविष्य, आधुनिक शिक्षा में अध्यात्म की ज़रूरत

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बाहरी तरक्की और आंतरिक शांति: अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर एक आह्वान

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस कोई त्योहार नहीं है। जब यूनाइटेड नेशन ने इसे घोषित किया, तो उन्होंने देखा कि विकसित देश इतनी संपन्नता होने के बावजूद भी वहाँ का युवा बहुत परेशान, डिस्टर्ब और डिप्रेस्ड हो गया है, ड्रग्स ले रहा है और आत्महत्या कर रहा है। उन्होंने दुनिया को चेतावनी देने के लिए ये दिन बनाया, क्योंकि युवा ही भविष्य है। हम दुनिया को क्या देकर जाएँगे? बँगला, गाड़ी और दौलत? पर असली भविष्य तो युवा है। यदि युवा आज खुद ही दुखी, परेशान,और अशांत है, तो भविष्य कैसा होगा? भारत विश्व गुरु क्यों कहलाया? अपनी आंतरिक शांति के लिए।1995 तक न मोबाइल, न कंप्यूटर, कुछ भी नहीं था; पर फिर भी जीवन में मौज और शांति थी।आज बाहरी विकास इतना हो गया है कि हम अमेरिका और यूरोप की टक्कर ले रहे हैं। बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें,टावर और मर्सिडीज आ गई हैं। बाहर इतनी कमाई है और हमारे बच्चे बाहर भाग रहे हैं, वो योग्य भी हैं; पर उनकी आंतरिक स्थिति क्या है? आज हमारे पास सब कुछ है, पर अंदर शांति नहीं है; इसलिए हम आंतरिक विकास खो रहे हैं। बाहर विकास हो रहा है, पर अंदर हम पूरा विनाश की ओर जा रहे हैं। हमने क्या सीखा? जब अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस घोषित हुआ, उसके बावजूद भी हमने कुछ नहीं सीखा। हम बाहर तो भागे, पर आंतरिक शांति जिसके लिए भारत विश्व गुरु था,वो खो दी। इस धरती पर श्री राम, श्री कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरु नानक देव, कबीर, फरीद, मीराबाई, सहजोबाई, लल्लाबाई, मुक्ताबाई और संत नामदेव व संत तुकाराम जैसे व्यक्तित्व आए, जिनको हम भगवान कहते हैं। बाहर भी जीसस, लाओत्से, सुकरात और भी बहुत से ऐसे महान व्यक्तित्व हुए। इन्होंने क्या कहा? इन्होंने केवल आंतरिक विकास की बात की, बाहरी विकास की इन्होंने कोई बात नहीं की। गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबिल, धम्मपद, कुरान, उपनिषद सिर्फ आंतरिक शांति की बात करते हैं। कोई बाहर की बात नहीं करता। तो फिर शिक्षा क्या है? वो भी ज्ञान है, जैसे गीता, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबिल, धम्मपद, कुरान, उपनिषद और अन्य ग्रंथ ज्ञान हैं, पर भारत इस ज्ञान को भूल गया। धर्म का अर्थ ही है स्वयं को जानना कि ‘मैं कौन हूँ?’ मौत के बाद शमशान में सब एक ही जगह राख हो जाते हैं। ये ज़िंदगी क्या है? इसे अध्यात्म कहते हैं, ‘स्पिरिट’ मतलब ऊर्जा या आत्मा जो तुम्हारे शरीर को गतिमान करती है। हमने बाहर की मोटी किताबें पढ़ी जो बाहर का विकास देती हैं, पर हमने आंतरिक विकास नहीं किया। जब हम उन ग्रंथों में दिए गए जीवन के ज्ञान को स्वयं पर अनुभव करेंगे, तो फिर हम उसे अपने स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में लागू कर पाएंगे। आज इस अंतराष्ट्रीय युवा दिवस पर यही कहूँगा कि सब युवाओं को जीवन का और इस शरीर रूपी इंस्ट्रूमेंट का ज्ञान दिया जाए। हमने सोलह सालों में हजारों-लाखों लोगों पर प्रयोग किया और पाया कि जो नौजवान इतनी गोलियाँ खा रहे थे या डिप्रेशन और सुसाइड के केस थे, वे अब जीरो हो गए। अब सभी खुश हैं। तभी हमने ‘मिशन 800 करोड़’घोषित किया ताकि इस जीवन के ज्ञान को दुनिया के आखिरी इंसान तक पहुंचा सकें, जो कि उनकी खुशी का एक समाधान है। इस अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर मैं चाहूँगा कि आप सब भी जो कॉलेज और स्कूल में हैं, पहले स्वयं को जानें कि ‘हम कौन हैं’? क्योंकि जो ग्रंथ दर्शन हैं, उनको जब हम स्वयं अनुभव करेंगे तो जीवन खुशहाल हो जाएगा। हमारे बच्चे भी मौज में आ जाएँगे और हर कोई खुश होगा, क्योंकि हमने पब्लिक में आने से पहले 16 साल तक इसका प्रयोग किया है। यही उम्मीद है कि इस अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर भारत एक सबक ले कि कभी भारत विश्व को शांति देने वाला देश था पर आज हम खुद अशांत हो रहे हैं। हमें अंदर की शांति को पाना होगा, उसे आगे बाँटना होगा और फिर से विश्व गुरु बनना होगा। तभी हमारा और संसार का जीवन खुशहाल होगा और मनुष्य जीवन सफल होगा ।
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