अशक्त लावारिस वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी अस्पतालों से उपचार के बाद तत्काल सरकारी संरक्षण केदो में भर्ती कराये जाने की मांग

0

देहरादून: संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल तथा समाजकल्याण मंत्री खजान दास को लिखे गए पत्रों मे संगठन ने खेद प्रकट करते हुए कहा है की राज्य में उत्तराखंड माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण तथा कल्याण नियमावली 2011 के अंतर्गत जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए हर जिले में संरक्षण केंद्रों के संचालन हेतु 15 साल पहले नियम बनाए गए हैं जो कुछ ही जिलों में बने हैं लेकिन दून के रायवाला क्षेत्र में ऐसा एक केंद्र संचालित है।

संगठन सचिव द्वारा लिखा गया है की दून अस्पताल तथा कोरोनेशन अस्पताल में लगभग 30 लावारिस मरीज ऐसे हैं जो ठीक होने के बाद भी असहाय लाचार होने के कारण यही बैड पर पड़े पड़े दिन गुजार रहे हैं जो शर्मनाक स्थिति है जिससे लगता है की चिकित्सा व्यवस्थाएं बिना लगाम के घोड़ो की तरह भाग रही हैं। दोनों मंत्रियों से अपेक्षाएं की गई हैं की ये कुव्यवस्थाओं की लगाम कस कर पकड़ लेंगे और सुशासन के दर्शन यहां हो पाएंगे।संगठन सचिव सुशील त्यागी ने कहा है की शासन के निर्देशों के बाद भी सरकारी चिकित्सालयों में चिकित्सक गैर संवेदनशील है अन्यथा ये लोग समाज कल्याण विभाग से संपर्क कर लावारिस वरिष्ठ नागरिकों को तो रायवाला स्थित संरक्षण केंद्र आदि में भेज सकते थे।अनुरोध किया गया है कि ठीक हो गए वरिष्ठ नागरिकों को लाचारी की अवस्था में रायवाला स्थित संरक्षण गृह में भर्ती कराने हेतु तत्काल निर्देश जारी करने का कष्ट करें।इसके साथ अनुरोध किया गया है की सभी जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं या नहीं इसकी भी जांच की जाय। पत्र की प्रतिलिपि सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडे तथा जिलाधिकारी को भी भेजी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Share