कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण ही मनुष्य को दुखों से मुक्ति दिला सकता है

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हरिद्वार। धर्म नगरी इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। पुरूषोत्म मास में पवित्र हर की पैड़ी पर गंगाजी के प्रवाह के साथ ज्ञान और भक्ति का प्रवाह दूसरे दिन भी जारी रहा। हर की पैड़ी के मालवीय घाट पवित्र गंगा के तट श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में मन्माध्व गौडेष्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने दूसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का प्रकाष एवं महात्म की अमृत वर्षा की। दूसरे दिन जूना पीठाधीष्वर आचार्य महामण्डलेष्वर स्वामी अवधेषानंद गिरि जी महाराज भी कथा में पहुचे।श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वषिष्ठ सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए आर्षीवाद लिया। श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन कथा श्रवण करने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। गंगाजी की आरती के बाद कथा प्रारम्भ होने पर हर की पैड़ी पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो जाता है। दूसरे दिन कथा व्यास का पूजन गंगा सभा के पदाधिकारियों के अलावा अमृतसर के अग्रवाल परिवार ने किया। इस मौके पर श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वषिष्ठ ने कथा के आयोजन एवं सनातन संस्कृति पर प्रकाष डालते हुए कथा व्यास का आभार जताया। उन्होने कहा कि यह भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि लोगों को प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश भी दे रही है।उन्होने अग्रवाल परिवार के साथ साथ सभी के लिए मंगलकामना मॉ गंगा से की। गोस्वामी पुंडरीक जी महाराज ने अपने मधुर वाणी में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं,बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण ही मनुष्य को दुखों से मुक्ति दिला सकता है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक क्षण अच्छे कर्मों और प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए। कथा सुनते समय श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए और “राधे-राधे” तथा “हरे कृष्ण” के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। भजन-कीर्तन ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।इस दौरान श्रीगंगा सभा उपाध्यक्ष हनुमंत झा,स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि,समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान,प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। गंगा तट पर दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया और गंगा घाट पुरी तरह से भक्तिमय रंगों सराबोर नजर आई।

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