‘द रोल अॉव नेचर इन विलियम शेक्सपियर्स ड्रामाज’ पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का हुआ आयोजन

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*जीबीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में हुआ आयोजन

*-विलियम शेक्सपियर के नाटकों में प्रकृति के रक्षक एवं विनाशक स्वरूपों का है सचिव चित्रण: प्रो. नीरज कुमार*

गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से 23 अप्रैल को मनायी जाने वाली अंग्रेजी साहित्य के महान नाटककार, कवि और अभिनेता विलियम शेक्सपियर के जन्म की 462वीं वर्षगांँठ एवं 410वीं पुण्यतिथि पर तथा 22 अप्रैल को मनाए जा रहे विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर “द रोल अॉव नेचर इन विलियम शेक्सपियर्स ड्रामाज” विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग एवं अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. डॉ. नीरज कुमार की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संयोजन प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल के संरक्षण में अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष एवं सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी एवं सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा, असिस्टेंट प्रोफेसर्स डॉ अफ्शां नाहिद एवं डॉ शबाना परवीन हुसैन ने किया।

व्याख्यान का शुभारंभ मुख्य वक्ता डॉ नीरज, प्रधानाचार्या डॉ पटेल, डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ रश्मि, डॉ पूजा, प्रीति शेखर, डॉ अफ्शां, डॉ शबाना आदि ने दीप प्रज्वलित करके किया। प्रधानाचार्या ने प्रो नीरज का स्वागत शॉल तथा पौधा भेंट करके किया। छात्रा अन्या गुप्ता, काव्या शर्मा, प्रिया सिंह, अनोखी सिंह, सौम्या वर्णवाल, एवं जाह्नवी कुमारी द्वारा वेलकम सॉन्ग की मधुर प्रस्तुति दी गई। प्रधानाचार्या ने डॉ नीरज का महाविद्यालय प्रांगण में अभिनंदन करते हुए विलियम शेक्सपियर को अंग्रेजी साहित्य का महान लेखक एवं ड्रामाटिस्ट बतलाया। उन्होंने कहा कि विलियम शेक्सपियर की रचनाओं को हम सभी ने बचपन से पढ़ा है तथा किसी न किसी रूप में हम सभी उन्हें जानते हैं। मैकबेथ, हैमलेट, अॉथेलो जैसे चर्चित ट्रैजडीज पर हिन्दी फिल्में भी बन चुकी हैं। विश्व पृथ्वी दिवस एवं विलियम शेक्सपियर की जयंती एवं पुण्यतिथि पर “शेक्सपियर के नाटकों में प्रकृति की भूमिका” विषय पर एक अत्यंत सुंदर एवं संतुलित कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रधानाचार्या ने अंग्रेजी विभाग को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। तत्पश्चात् डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने डॉ. नीरज कुमार की शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उनका संक्षिप्त परिचय साझा किया। उनकी शैक्षणिक सक्रियता को अनुकरणीय बतलाते हुए कहा कि निर्दिष्ट विषय पर उनके विश्लेषणात्मक विचारों को सुनना छात्राओं के साथ सभी फैकल्टीज के लिए भी एक अत्यंत उपयोगी अवसर है।

प्रो नीरज कुमार ने अपने वक्तव्य में विलियम शेक्सपियर द्वारा रचित प्रसिद्ध कॉमेडीज ‘एज़ यू लाइक इट’, ‘अ मिडसमर नाइट्स ड्रीम’, टेम्पेस्ट, ‘मच अडू अबाउट नथिंग’, एवं ‘ट्वेल्थ नाइट’ तथा प्रसिद्ध ट्रैजेडीज ‘अॉथेलो’, ‘किंग लियर’, ‘मैकबेथ’, ‘हैमलेट’ में प्रकृति की मित्रवत भूमिका तथा रौद्र भूमिका पर नाटक से उद्धृत विभिन्न संदर्भों द्वारा सविस्तार विचार रखे। उन्होंने कहा कि शेक्सपियर के साहित्य में प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि एक जीवंत पात्र है, जो भावनाओं को दर्शाती है, मानवीय जगत में घटने वाली घटनाओं को प्रभावित करती है, सुख-दुख में निष्पक्ष भागीदार के रूप में उपस्थित रहती है। शेक्सपियर आँधी, तूफान, जंगल एवं पशु-पक्षियों आदि के सिम्बॉल्स तथा इमेजरी द्वारा मानवीय मनोभावों का अविस्मरणीय चित्रण करते हैं। प्रो नीरज ने ‘किंग लियर ‘में वर्णित तूफानी रात, ‘द टेम्पेस्ट’ में कैलिबान की यादगार भूमिका, ‘मैकबेथ’ में डंकन की हत्या के बाद प्रकृति का अनियंत्रित हो जाना’ जैसे विभिन्न दृश्यों का परिप्रेक्ष्य लाते हुए विलियम शेक्सपियर के नाटकों में प्रकृति की रक्षक एवं विनाशक भूमिकाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने सभी को विश्व पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए धरती और प्रकृति दोनों को बचाने की जरूरत पर बल दिया। कहा कि विलियम शेक्सपियर के नाटक प्रकृति संरक्षण में साहित्य की भूमिका को स्पष्ट करने में पूर्णरूपेण सक्षम हैं।

व्याख्यान के उपरांत प्रधानाचार्या के निर्देश पर छात्रा अन्या गुप्ता, काव्या शर्मा, अनोखी सिंह, सौम्या वर्णवाल ने विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक ‘द मर्चेंट अॉफ वेनिस’ के क्लाइमेक्स कोर्ट ट्रायल सीन को बड़े ही जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। बतौर नैरेटर डॉ अफ्शां नाहिद ने बारी-बारी से सभी पात्रों का परिचय करवाया। छात्राओं द्वारा एंटोनियो, शायलॉक, बसेनियो, पोर्टिया एवं वकील के रोल प्ले को देख सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का संचालन डॉ शबाना परवीन हुसैन ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ पूजा ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। व्याख्यान का लाभ प्रो. अफ्शां सुरैया, डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ जया चौधरी, डॉ पूजा राय, डॉ अमृता कुमारी घोष, डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ अनामिका कुमारी, डॉ नगमा शादाब, डॉ कृति सिंह आनंद, डॉ बनीता कुमारी, डॉ फरहीन वज़ीरी, डॉ रुखसाना परवीन, प्रीति शेखर, डॉ प्यारे माँझी, डॉ आशुतोश कुमार पांडेय, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ सुरबाला कृष्णा, डॉ शुचि सिन्हा, डॉ वीणा कुमारी जायसवाल, डॉ विजेता लाल, डॉ फातिमा, डॉ नुद्रतुन निसां, डॉ प्रमिला कुमारी, डॉ सीता, डॉ सपना पांडे, डॉ दीपिका, डॉ गणेश प्रसाद, डॉ वीणा कुमारी, डॉ अमृता कुमारी, डॉ किरण कुमारी, डॉ रूही खातून, डॉ सीमा कुमारी, अभिषेक कुमार भोलू, रौशन कुमार, नीरज कुमार, राजेश कुमार, विक्रम कुमार, अजीत कुमार, अजय कुमार, राजेश कुमार सहित विभिन्न विभागों की सौ-सवा सौ से अधिक छात्राओं ने उठाया।

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