*शब्दवीणा के तीसरे स्थापना दिवस पर हुआ “कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन*
*-शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता एवं समाज सेवा के क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाले विभूतियों को अंगवस्त्र एवं शब्दवीणा स्मृति चिह्न प्रदान करके किया गया सम्मानित।*
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ के तीसरे स्थापना दिवस पर 30 मार्च को शब्दवीणा की बिहार प्रदेश समिति एवं औरंगाबाद जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में दानिका संगीत महाविद्यालय के सभागार में “कवि सम्मेलन, विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह” का आयोजन हुआ। शब्दवीणा की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रश्मि प्रियदर्शनी के निर्देशन में एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह- औरंगाबाद जिला अध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी एवं जिला संरक्षक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र की कुशल देखरेख व संयोजन में आयोजित यह समारोह उद्घाटन सत्र, सम्मान सत्र, एवं, विचार गोष्ठी-सह-कवि सम्मेलन, तीन सत्रों में विभाजित था। कार्यक्रम का शुभारंभ दानिका संगीत महाविद्यालय एवं शब्दवीणा औरंगाबाद जिला समिति की सदस्य कलाकारों द्वारा सुमधुर स्वर में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
शब्दवीणा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, शब्दवीणा के जिला संरक्षक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा, जम्होर पंचायत मुखिया प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह, सिन्हा कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ रामाधार सिंह, डॉ शिवपूजन सिंह, जेपी सेनानी डॉ ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह, पृथ्वीराज ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष रामप्रवेश सिंह, राष्ट्रीय उद्गोषक आफताब राणा, एंटी करप्शन ब्यूरो के सचिव आदित्य श्रीवास्तव, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक अजीत मिश्रा, दानिका संगीत महाविद्यालय के निदेशक डॉ रविंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से समारोह का दीप प्रज्ज्वलित किया। सम्मान सत्र में शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, एवं सामाजिक क्षेत्रों में विशिष्टता कार्य करने वाले 16 विभूतियों को अंगवस्त्र तथा शब्दवीणा स्मृति चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने की, एवं संचालन सुरेश विद्यार्थी द्वारा किया गया। शब्दवीणा औरंगाबाद जिला सचिव सतीश कुमार पांडेय ने शब्दवीणा का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। श्री पांडेय ने शब्दवीणा की देश के बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, पंजाब आदि विभिन्न प्रदेशों एवं जिलों में गठित समितियों की साहित्यिक सक्रियता, हिंदी सेवा, एवं सुदृढ़ होती सांगठनिक संरचना पर प्रकाश डाला। शब्दवीणा द्वारा नियमित रूप से आयोजित होने वाले कार्यक्रम ‘एक शाम, साहित्य के नाम’, ‘शब्दवीणा सृजन त्रिविधा’, शब्दवीणा भेंटवार्ता ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’, ‘सरगम’, शब्दवीणा संगीत संध्या आदि के प्रयोजनों को साझा किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी एवं शब्दवीणा के संरक्षक, परामर्शदाता, पदाधिकारी, एवं सदस्यों के मार्गदर्शन व नेतृत्व में आयोजित विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की समाजोपयोगिता एवं सफलता पर बातचीत हुई।
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ पढ़ीं। आफ़ताब राणा के गीत “होना है, तो होना है” को श्रोताओं ने खूब सराहा। डॉ हेरम्ब मिश्रा के व्यंग्य रचनाएँ सुन कार्यक्रम स्थल हास्य रस से ओतप्रोत हो गया। बेहतरीन मगहिया अंदाज में हेरम्ब मिश्रा ने काव्य पाठ किया। डॉ ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह की राष्ट्रवाद से प्रेरित कविताएँ सुन वातावरण देशभक्ति के भावों से भर उठा। मथुरा रंजन ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर आधारित कविता पढ़ी। समारोह में अजीत मिश्र, पुरंजय प्रसाद, राणा सुनील सिंह, सुजीत कुमार सिंह, मधुसूदन पांडेय, सुबोध कुमार पांडेय, वेद प्रकाश, कुंदन सिंह कोंबो, शिवांगी सिंह, अंजली सिंह, जूही कुमारी, रूपेश रौशन, रवि शंकर सहित अनेक साहित्यानुरागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, महावीर सिंह वीर, अजीत अग्रवाल, प्रो सुबोध कुमार झा, डॉ वीरेन्द्र कुमार, डॉ विजय शंकर, ललित शंकर, अरुण अपेक्षित, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, जैनेन्द्र कुमार मालवीय, पी.के. मोहन, डॉ रवि प्रकाश, पंकज मिश्र, अशोक राय वत्स, सरोज कुमार, सुरेश गुप्ता, रामनाथ बेख़बर, हीरा लाल साव, पुरुषोत्तम तिवारी आदि ने कार्यक्रम का आनंद उठाया।
