पंकज धीर जी किरदार से ही कर्ण नहीं बल्कि संस्कारों से भी कर्ण की तरह थे : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

0

*💥महाभारत के कर्ण, स्व पंकज धीर जी की आत्मा की शान्ति हेतु परमार्थ निकेतन में धीर परिवार ने की शान्ति पूजा*

ऋषिकेश। भारतीय टेलीविजन और सिनेमा जगत के वरिष्ठ कलाकार, श्री पंकज धीर जी को उनके असाधारण योगदान और यादगार अभिनय के लिए परमार्थ निकेतन में स्मरण किया। पंकज धीर जी के पुत्र, निकितन धीर, अपने परिवार के सदस्यों के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट करने परमार्थ निकेतन पहुंचे और स्वामी जी के साथ अपने पिता की स्मृतियाँ साझा कीं और उनकी आत्मा की शान्ति के लिये एक विशेष शान्ति पूजा का आयोजन किया गया।
पंकज धीर जी का नाम भारतीय धारावाहिकों और फिल्मों में एक अद्वितीय पहचान के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। बी. आर. चोपड़ा के कालजयी धारावाहिक महाभारत में कर्ण की भूमिका में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने जिस भाव, दृढ़ता और गरिमा के साथ कर्ण का व्यक्तित्व मंचित किया, वह दर्शकों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया। उनके द्वारा निभाई गई भूमिका कर्ण के चरित्र की गहराई को दर्शाती है, जो भारतीय टेलीविजन इतिहास में भी एक मिसाल बन गई।
इसके अलावा पंकज धीर जी ने सड़क, सोल्जर, बादशाह, तार्जन, द वंडर कार और चंद्रकांता जैसे कई धारावाहिकों में भी अपनी छाप छोड़ी। फिल्मों में उनके अभिनय की विविधता और संजीदगी ने उन्हें युवा पीढ़ी और पुराने दर्शकों दोनों के बीच प्रिय बना दिया। हर किरदार में उनका अभिनय सहज और प्राकृतिक था, जिससे दर्शक भावनाओं से जुड़ते गए और उनकी स्मृति हमेशा ताजा रही।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने धीर परिवार से सहानुभूति और अपनी संवेदनाएँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि कलाकार केवल अभिनय ही नहीं करते, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रतीक भी होते हैं। पंकज धीर जी ने अपने समर्पित प्रयास और उत्कृष्ट कौशल से भारतीय धारावाहिकों और फिल्मों के माध्यम से संस्कृति, निष्ठा और सम्मान का संदेश प्रस्तुत किया। उनके योगदान ने न केवल मनोरंजन जगत को समृद्ध किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी स्थापित किया।
निकितन धीर ने अपने पिता की यादों को साझा करते हुए बताया कि पंकज धीर जी का जीवन केवल अभिनय तक सीमित नहीं था। वे एक आदर्श परिवार पुरुष, एक समर्पित पिता और समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक भी थे। उनके जीवन में विनम्रता, सहजता और कर्मठता हमेशा स्पष्ट झलकती थी।
पंकज धीर जी का जीवन स्क्रीन तक सीमित नहीं था। वे पात्रों की गहराई और सजीवता दर्शकों के दिलों में हमेशा जीवित रखना चाहते थे। कर्ण का उनका चरित्र, जिसकी निष्ठा, वीरता और संघर्ष की कहानी आज भी लोगों के मन में प्रेरणा जगाती है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने धीर परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि यादें और संस्कार ही हमे प्रियजनों के निकट बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि पंकज धीर जी की विरासत केवल उनके अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आदर्श, संस्कार और जीवन दृष्टि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।
धीर परिवार ने अपने पिता की स्मृतियों और उनके जीवन के अद्वितीय योगदान को साझा करते हुए भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। पंकज धीर जी का नाम भारतीय धारावाहिकों और फिल्मों में हमेशा आदर्श और प्रेरणा के रूप में याद रखा जाएगा।
परमार्थ निकेतन से पंकज धीर जी के व्यक्तित्व, आदर्श और योगदान को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर श्रीमती अनीता धीर, पत्नी, निकितन धीर, पुत्र, नितिका शाह, पुत्री, रुशांग शाह जामाता, विपिन खन्ना, पिंकी खन्ना ने शान्ति पूजा की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Share