परियोजना के विरोध में उतरे 20 गांवों के ग्रामीण, किया प्रदर्शन

0

देहरादून। आठ दशकों के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर बनने वाली महत्वाकांक्षी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी तो मिल गई है। इसके साथ ही इसके प्रस्तावित स्थल चयन को लेकर जन-विरोध भी भड़क उठा है। परियोजना से प्रभावित हो रहे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के करीब 20 गांवों के निवासियों ने क्वाणू गांव में एकत्र होकर उग्र प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने चक्का जाम भी किया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन कालसी के एसडीएम प्रेमलाल को सौंपकर अपनी समस्याओं और मांगों पर तत्काल ध्यान देने की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों से चल रही इस परियोजना को लेकर आज तक किसी भी संबंधित विभाग या सरकार ने स्थानीय निवासियों से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की है। उपजाऊ भूमि का नुकसान, क्वाणू गांव और आसपास के क्षेत्रों की सैकड़ों हेक्टेयर सबसे उपजाऊ कृषि भूमि इस बांध की भेंट चढ़ने जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। अस्पष्ट पुनर्वास नीति, प्रभावित क्षेत्र के लोग मांग कर रहे हैं कि गांव और उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए ठोस विकल्प तलाशे जाएं। साथ ही विस्थापन और मुआवजे की नीति ग्रामीणों के साथ संवाद कायम करके ही तय की जाए।संघर्ष समिति और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन ने समय रहते उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। किशाऊ बांध प्रभावित संरक्षक समिति के संरक्षक मुन्ना राणा कहा कि हमारी तो सीधी सी मांग है. एक साल पहले मुख्यमंत्री से हम मिले थे। संभर, क्वाणू से वह टोटल एरिया लूज है। हम डैम बनाने का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन कम से कम इसके लिए हार्ड रॉक तो हो, यह हार्ड रॉक वाला एरिया नहीं है। कई जगह जमीन धंसी हुई है। दोनों तरफ जितनी भी जगह उन्होंने टनल बनाने की कोशिश थी उसके अंदर वैसे ही मशीन धंसी है। सरकारी मशीनरियों ने सरकार को गुमराह किया है। इसमें 20 गांव के ग्रामीण है.प्रभावित संर्घष समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह चैहान ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड 20 गांव के लोग एकत्रित हुए हैं। अपने थाती माटी को बचाने के लिए हम धरना कर रहे हैं। हमारा विरोध इस परियोजना का नहीं है। 2023 में भी हमने इसके बारे में बताया था। 2023 में कालसी तहसील मे एक बैठक हुई थी। जिसमें उपजिलाधिकारी और विभाग के लोग थे. तब से हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। बताया गया कि वहां का सर्वे कर लिया है। अब आप हमको काम करने दीजिए। हमारे ग्रामीणों ने काम करने की अनुमति भी दे दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share