सामूहिक दुष्कर्म का मामला निकला षड्यंत्र, आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे:पुलिस अधीक्षक

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चम्पावत. चर्चित सामूहिक बलात्कार काण्ड जाँच के बाद फर्जी पाया गया है.पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने स्वयं पीड़िता से बातचीत कर घटनास्थल का निरीक्षण किया और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए आरएफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी तत्काल कराए। विवेचना के दौरान सामने आया कि पीड़िता विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की जांच की।
मेडिकल परीक्षण में न तो किसी संघर्ष के निशान मिले और न ही जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत। कई गवाहों के बयान भी तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खाए।
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब जांच में पाया गया कि नामजद आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे। पुलिस का कहना है कि गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों से यह तथ्य पुष्ट हुआ है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना वाले दिन असामान्य रूप से लगातार संपर्क हुआ था। पुलिस के अनुसार बदले की भावना से प्रेरित होकर एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पूरे घटनाक्रम को रचा गया।
चम्पावत पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में जीरो टोरलेंस नीति अपनाई जाती है, लेकिन यदि जांच में आरोप भ्रामक या मनगढ़ंत पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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