अध्यात्म के जागरण से ही भारत विश्वगुरु बनेगा – सतपाल महाराज

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हरिद्वार 13, अप्रैल। स्थानीय ऋषिकुल कॉलेज मैदान में मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा श्री प्रेमनगर आश्रम के तत्वावधान में वैशाखी महोत्सव के पावन पर्व पर तीन दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिवस पर संबोधित करते हुए उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुविख्यात समाजसेवी श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि अध्यात्म का जागरण जब भारत वर्ष में होगा तो विवेकानन्द,वीर शिवाजी भी पैदा होंगे। अध्यात्म के जागरण से ही भारतवर्ष पुनः विश्वगुरु के स्थान को प्राप्त करेगा।इसलिए हम सद्भावना सम्मेलनों को आज जगह – जगह कर रहे हैं। आप लोग संकल्प लेकर अपनी सोई हुई आत्मा को जगाएं गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने उन वीर सिपाहियों को जो देश की रक्षा के लिए लड़ रहे थे उनकी आत्मा को जगाया और जगाकर एक वीर योद्धा के रूप में मानव समाज के सामने खड़ा किया, साथ ही साथ धर्म के मर्म को भी समझाया, धैर्य व साहस का भी उन्होंने परिचय दिया।

श्री महाराज जी ने कहा की जब-जब अधर्म बढ़ता है, धर्म की हानि होती है, तब उसके समाधान के लिए महान पुरुषों का आना होता है। हमारे भारत में महान पुरुषों की श्रृंखला हम मनाते आए हैं। इसलिए हम सनातन धर्म को मानते हैं, क्योंकि उसका न आदि है, न अंत है। उसके अंदर वेदों का ज्ञान है, उपनिषदों का ज्ञान है महान पुरुषों की वाणी है, महान पुरुषों का इतिहास पुराणों के रूप में यह सारी चीजे हमारे सामने आती हैं और पुराणों की जो कथाएं हैं उन कथाओं का अगर हम सार देखें तो यही होता है कि व्यक्ति को आत्मज्ञान जानना चाहिए। इसी से ही व्यक्ति का कल्याण होता है।

महाराज श्री ने आगे कहा कि संत समझाते हैं कि संसार के अंदर क्यों भटकते हो वह शक्ति तुम्हारे अंदर है और जब ज्ञान के जरिए तुम उसको जानोगे तब पता चलेगा। अभी कुछ दिन के बाद ही बद्रीनाथ केदारनाथ की यात्रा शुरू होने वाली है। बद्रीनाथ के अंदर क्या हुआ कि नर और नारायण ने तपस्या की। सहस्त्र कवच राक्षस को मारने के लिए उन्होंने एक वर्ष की तपस्या की, एक तपस्या करता था, एक युद्ध करता था। ऐसे सारे कवच काट डाले एक कवच बचा तो वह भाग गया और द्वापर युग में वह करण के रूप में पैदा हुआ। नर और नारायण श्री कृष्णा और अर्जुन के रूप में पैदा हुए तब नारायण ने कहा अर्जुन से अब तुम कर्ण का वध करो यह एक कवच लेकर आया हुआ है तो बद्रीनाथ में नर और नारायण ध्यान करते थे मंदिर के अंदर आप देखेंगे कि भगवान बद्री विशाल ध्यानवत बैठे हुए हैं और ध्यान कर रहे हैं। कहने का अभिप्राय है यह है कि वहां महापुरुषों ने ध्यान किया। ध्यान का मतलब मन को एकाग्र करना, मन को परमात्मा में लगाना है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने सम्मेलन में उपस्थित सभी भक्तों को सम्बोधित किया और कहा कि हमारा भारत आज विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है, सभी देशों की निगाहे भारत की ओर टिकी है। आगे कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी देश को नई दिशा व गति प्रदान कर रहे है। आप सबका साथ मिल रहा है तभी देश का विकास अग्रसर हो रहा है। आगे कहा कि समान नागरिक संहिता(UCC) को लागू करने वाला उत्तराखंड एक मात्र ऐसा पहला राज्य है। सम्मेलन में सभी श्रद्धांलु भक्तों का इस गंगा जी के पावन तट पधारने पर उन्होंने अभिवादन और वंदन किया।

कार्यक्रम से पूर्व माननीय मुख्यमंत्री श्री धामी जी को श्री महाराज जी ने स्मृति चिन्ह, श्री विभु जी ने अंग वस्त्र, श्री सुयश जी ने पुष्प गुच्छ और समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओ से स्वागत किया।

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