मोहन भागवत ने किया उतराखण्ड निवासी लेखक डॉ. गगन माटा की पुस्तक का विमोचन

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” पुस्तक सूचना प्रौद्योगिकी एवं पंच परिवर्तन” हरिद्वार निवासी डा. गगन माटा द्वारा लिखित

सोल ऑफ इंडिया हरिद्वार

भारतीय शिक्षण मण्डल की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रान्त टोलियों की बैठक का आर्ट ऑफ़ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु में विगत दिवस संपन्न हुई ।

इसमें समापन सत्र में राष्ट्रीय सेवक संघ सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने करकमलों से
पुस्तक शीर्षक “सूचना प्रौद्योगिकी एवं पंच परिवर्तन” का विमोचन किया जिसे गुरुकुल कांगड़ी सम विश्विद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ गगन माटा ने लिखा है।

यह पुस्तक “विकसित भारत 2047″ के निर्माण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology – IT) और पंच परिवर्तन (Panch Parivartan) को राष्ट्रीय विकास के प्रमुख आधार के रूप में स्थापित किया गया है। पुस्तक के अनुसार, तकनीक का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समावेशी शासन, पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक समानता तथा नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। यह दृष्टिकोण आत्मनिर्भर भारत तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है और डिजिटल परिवर्तन, सशक्त संस्थानों तथा नागरिक सहभागिता को विकसित भारत की आधारशिला मानता है।

पुस्तक के विमोचन के समय पुस्तक के लेखक डॉ गगन माटा गुरुकुल काँगड़ी
समविश्वविद्यालय, हरिद्वार, डॉ अमित रावत, आगरा कॉलेज आगरा, एवं अमित दत्ता निर्देशक, एआईसीटीई, भारत सरकार, नई दिल्ली, प्रोफेसर महेश मनचंदा शारदा विश्वविद्यालय नोएडा उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस बैठक में देशभर के सभी 45 प्रांतों से आए शिक्षाविद्, कुलपति, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, संगठन पदाधिकारी तथा शिक्षा विशेषज्ञ सहभागी बने हैं। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में शिक्षा की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी तथा भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानंद सहित अनेक शिक्षाविदों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही ।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी रहे।
अपने मार्गदर्शन में प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि आज विश्व अनेक संकटों और जटिल प्रश्नों से जूझ रहा है। वर्तमान वैश्विक विचारधाराएँ और व्यवस्थाएँ जीवन को आंशिक रूप से देखती हैं, जबकि भारत की दृष्टि जीवन, समाज, प्रकृति और समस्त सृष्टि को एकात्म रूप में समझती है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परम्परा का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि धर्म, संतुलन और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है।
उन्होंने कहा, “विश्व को पूर्णता प्रदान करना हमारा कार्य है। हमारी समग्र दृष्टि के आधार पर समस्त प्राणिमात्र के कल्याण के लिए भारत की वाणी को विश्व को सुनना ही होगा। यह समय की आवश्यकता भी है और अनिवार्यता भी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय दृष्टि अन्य विचारों को अस्वीकार नहीं करती, बल्कि प्रत्येक समाज के अनुभवजन्य सत्य का सम्मान करती है। भारतीय चिंतन की ‘अनेकता’ की अवधारणा सभी दृष्टिकोणों का आदर करते हुए शास्त्रार्थ और संवाद के माध्यम से सत्य के व्यापक स्वरूप को समझने का मार्ग प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कौशल-आधारित शिक्षा की आवश्यकता है ताकि युवा रोजगार योग्य, उद्यमी और आत्मनिर्भर बन सकें। किन्तु संस्कारों से रहित कौशल समाज में असंतुलन उत्पन्न कर सकता है। भारतीय शिक्षा का उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है जिसमें कुशल हाथ, चिंतनशील मस्तिष्क और संवेदनशील हृदय का समन्वय हो।

समापन सत्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने करकमलों से
पुस्तक शीर्षक “सूचना प्रौद्योगिकी एवं पंच परिवर्तन” का विमोचन किया ।
यह पुस्तक “विकसित भारत 2047” के निर्माण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology – IT) और पंच परिवर्तन (Panch Parivartan) को राष्ट्रीय विकास के प्रमुख आधार के रूप में स्थापित किया गया है। पुस्तक के अनुसार, तकनीक का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समावेशी शासन, पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक समानता तथा नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। यह दृष्टिकोण आत्मनिर्भर भारत तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप है और डिजिटल परिवर्तन, सशक्त संस्थानों तथा नागरिक सहभागिता को विकसित भारत की आधारशिला मानता है।

पुस्तक के विमोचन के समय पुस्तक के लेखक डॉ गगन माटा गुरुकुल काँगड़ी
समविश्वविद्यालय, हरिद्वार, डॉ अमित रावत, आगरा कॉलेज आगरा, एवं अमित दत्ता निर्देशक, एआईसीटीई, भारत सरकार, नई दिल्ली, प्रोफेसर महेश मनचंदा शारदा विश्वविद्यालय नोएडा उपस्थित रहे ।

बैठक का समापन भारतीय ज्ञान परम्परा आधारित, समग्र, मूल्यनिष्ठ एवं राष्ट्रोन्मुख शिक्षा व्यवस्था के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। भारतीय शिक्षण मण्डल ने देशभर के शिक्षकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षा संस्थानों से इस राष्ट्रीय शैक्षिक पुनर्जागरण अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया

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