“शिक्षा, स्वास्थ्य , रोजगार न माँगूँगा सरकार, ठीक कर दो मेरा SIR” -कांग्रेस नेता राव आफाक अली
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राव आफाक अली ने लगाया एसआईआर के नाम लोगों को परेशान करने का आरोप
कुछ लोगों के सरनेम गलत हो गए हैं स्पेलिंग के हिसाब से जबकि सरनेम की कोई अहमियत नहीं होती है। नाम को मुख्य मानना चाहिए:मनोज धनगर

हरिद्वार। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राव आफाक अली ने कहा कि एसआईआर के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता की शुरुआत उन्होंने “शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार न माँगूँगा सरकार, ठीक कर दो मेरा SIR” -कहकर कही, राव आफाक ने कहा स्पेलिंग मिस्टेक जैसी छोटी छोटी गलतियों पर लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। परेशान लोग अपना कामकाज छोड़कर सरकारी दफ्तरों और बीएलओ के चक्कर काट रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। आधार कार्ड, पहचान पत्र, राशन कार्ड होने के बावजूद भी लोगों को अपनी पहचान के लिए इधर-उधर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राव आफाक ने एक कहानी सुनाई कि एक परिवार का मुखिया था। दीपावली से पूर्व परिवार के बच्चों ने मुखिया से पटाखे, कपड़े और मिठाइयों की माँग की। मुखिया उन माँगों को पूरा करने में सक्षम नहीं था, क्योंकि यह नकारा और निकम्मा था। उसने एक चाल चली। दीपावली से दो दिन पूर्व ही उसने पड़ोस में पत्थर फेंक दिए।
हंगामा इतना बड़ा कि उसके बच्चों को पुलिस उठाकर ले गई। तब बच्चों की माँ और रिश्तेदार थाने पहुंचे। बच्चों ने रो-रोकर कहा, मम्मी हमें कपड़े, मिठाई और पटाखे नहीं चाहिए। हमारी जमानत के लिए आप चार लोगों को लेकर आइए, जिनके पास उनकी प्रॉपर्टी के कागजात, आधार कार्ड, पहचान पत्र और दो-दो फोटो हो, साकि हम जेल जाने से बच जाएँ और हमारा भविष्य खराब न हो।” बच्चों की माँ और रिश्तेदार जमानत के कागजों की तलाश में जुट गए और दीपावली के कपड़े, मिठाई और पटाखे भूल गए। ठीक उसी प्रकार देश की आज़ादी के 80 साल बाद आज देश के नागरिकों को नोटबंदी, लॉकडाउन, हिंदू-मुस्लिम और SIR जैसे मामलों में उलझाकर रखा गया है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की माँग न करें। जबकि हकीकत यह है कि 2011 के बाद सरकार जनगणना तक नहीं करा पाई और आज तक एक भी ऐसी आईडी नहीं बना पाई, जिसे दिखाकर भारतीय नागरिक गर्व से कह सके कि “मैं भारतीय हूँ।”
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राव आफाक अली ने आगे कहा सरकार आज तक भी कोई ऐसा दस्तावेज नहीं बना पायी है जिसे नागरिकता का प्रमाण माना जा सके। इसलिए हर जगह प्रयोग किए जा रहे आधार कार्ड को ही नागरिकता का प्रमाण बनाया जाए और इसे मतदाता सूची से लिंक किया जाए। पहचान के लिए बार-बार प्रमाण मांग कर लोगों को परेशान ना किया जाए। सब आफाक अली ने कहा कि 2003 की वोटर लिस्ट को सरकार ने हिंदी से अंग्रेज़ी में परिवर्तित किया, जिससे बहुत से लोगों के नामों की स्पेलिंग गड़बड़ा गई और अब वे लोग परेशान हैं।
दूसरी बात, कुछ लोग अपने सरनेम से परेशान हैं। जबकि सरनेम की कोई अहमियत नहीं होती। वास्तविक नाम ही इंसान की असली पहचान होता है। अतः सरकार को चाहिए कि हिंदुस्तान की 90% जनता, जो अंग्रेज़ी में काम करना नहीं जानती, उसे ध्यान में रखते हुए वोटर लिस्ट भारतीय राष्ट्रभाषा हिंदी में ही रखी जाए और भारत के सभी कार्य, जो भारत में किए जाते हैं, वे राष्ट्रभाषा हिंदी में ही किए जाने चाहिए।
जबकि भारत देश ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का अनुयायी है, जो पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है। लेकिन यहाँ सो अपने ही शासक उन लोगों से भारतीय होने का प्रमाण माँग रहे हैं, जिनके पूर्वजों ने 90 वर्षों तक लाठियां खाई, गोलियों खाई, जेलों में सड़े, फॉसियों पर लटके और देश को आजाद कराया। आजादी के 80 वर्ष बाद भी उन्हीं लोगों से भारतीय नागरिकता का प्रमाण BLO के माध्यम से माँगा जा रहा है, जो गलत है।
जबकि यह कार्य क्षेत्रीय लेखपाल, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं इंटर कॉलेज के शिक्षकों से कराया जाना चाहिए, जिनकी लिखावट अच्छी हो तथा जो हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद और स्पेलिंग को तरह समझकर कार्य करने में सक्षम हों, ताकि उसकी जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सके
प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मनोज धनगर ने कहा कि 2003 की वोटर लिस्ट को सरकार ने हिंदी से अंग्रेजी में परिवर्तित कर दिया है। जिससे बहुत से लोगों के नाम की स्पेलिंग गड़बड़ा गई है। उसे ठीक करने के लिए मतदाताओं से कागजात मांगे जा रहे हैं। जिससे लोग परेशान हो रहे हैं। कुछ लोगों के सरनेम गलत हो गए हैं स्पेलिंग के हिसाब से जबकि सरनेम की कोई अहमियत नहीं होती है। नाम को मुख्य मानना चाहिए, उन्होंने मांग की कि एसआईआर मे पारदर्शिता के साथ सरलीकरण प्रक्रिया को अपनाया जाए। इस दौरान पवन पाल, प्रवीण पाल, राव यावर अली आदि मौजूद रहे।
