जमीनों की खरीद-फरोख्त के फर्जीवाडो को रोकने के लिए अधिनियम में आवश्यक कानूनी प्रावधान शामिल किए जाने की मांग

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देहरादून/ राज्य में बढ़ रहे जमीनों की खरीद-फरोख्त के फर्जीवाडो को रोकने के लिए, जनहित में उत्तराखंड में लागू भूमि सुधार अधिनियम 1950 में आवश्यक कानूनी प्रावधान शामिल किए जाने की मांग करते हुए संयुक्तनागरिकसंगठन की ओर से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा गया है।कहा गया है कि राज्य गठन के 23 वर्षों में भू- माफियाओं तथा प्रॉपर्टी डीलरों से संबंधित आपराधिक फर्जीवाड़े के असंख्य मामले सामने आ चुके हैं परन्तु इन पर कठोर अंकुश लगाने में अभी तक सभी सरकारें असफल रही हैं।फर्जीवाडो के शिकार लोगो मे पूर्व सैन्यकर्मी, सेवानिवृत्त पेंशनर्स, पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासी,वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं आदि भी शामिल हैं जो वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाना तत्काल जरूरी है।मांग पत्र मे कहा गया है की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े को रोकने हेतु शासन द्वारा जारी नीतिगत निर्देशों के अनुपालन में जिला मजिस्ट्रेट देहरादून द्वारा रजिस्ट्री के समय जमीन का 12 साला रिकॉर्ड, खतौनी की नकल, तरसाए पोर्टल की रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया था परंतु स्थानीय अधिवक्ताओं के विरोध के कारण यह लागू नहीं हो सका और यह दुखद है।अनुरोध किया गया है कि शासन के नए निर्देश उत्तराखंड की आम जनता के हित में हैं और इन्हें वैधानिक रूप से लागू करने के लिए उत्तराखंड में लागू उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 में संशोधन हेतु आवश्यक कदम तत्काल उठाए जायें जिससे भू माफियाओं की साजिशों के शिकार मासूम क्रेताओं को घोटालों से सुरक्षा मिल सके।इन संशोधनो में दोषी विक्रेताओं बिचौलियों संबंधित प्रॉपर्टी डीलर्स पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई के प्राविधान किया जाना भी जरूरी होगा।

चित्र सांकेतिक साभार

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