*शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता “सत्यम् शिवम् सुंदरम्” में वरिष्ठ कवि दीपक कुमार के गीतों पर लगीं खूब वाह वाहियाँ*
*-लिखो कवि वह क्रांति छंद तुम, जन-गण-मन में ज्वाल जलाओ* *-मैं कलम से हौसलों को वीर रस के छंद दूंगा*...
*-लिखो कवि वह क्रांति छंद तुम, जन-गण-मन में ज्वाल जलाओ* *-मैं कलम से हौसलों को वीर रस के छंद दूंगा*...
यह एक तरह की क्रांति है जो नारों या बैनरों के साथ अपनी घोषणा नहीं करती। यह खिड़कियां नहीं तोड़ती...
— स्मृति लेख: कैलाशी पीयूष शर्मा सोल ऑफ इंडिया, हरिद्वार 16 जून 2013 — एक ऐसा कालखंड जिसे स्मरण करते...
जाति जनगणना दशकों से निष्क्रिय रही है, जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों तक ही सीमित है। बिहार जाति जनगणना...
बीते एक साल में यूजीसी ने एक दर्जन से अधिक प्राइवेट विश्वविद्यालयों पर पीएच.डी. डिग्री ऑफर करने पर रोक लगाई...
अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों और वकालत समूहों की ओर से बढ़ते आरोपों ने भारत को वैश्विक स्तर पर तीखी जांच...
भविष्य की आहट / डा. रवीन्द्र अरजरिया पाकिस्तान को ढाल बनाकर चीन ने अपनी चौधराहट को बढाने में एक बार...
22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम घाटी की शांति, जो लंबे समय से अपने हरे-भरे घास के मैदानों और शांत नदियों...
दशकों से भारत में वक्फ संपत्तियां- जिनका उद्देश्य गरीबों की सेवा करना, शिक्षा का समर्थन करना और धार्मिक और सामाजिक...
*-कविताओं के माध्यम से दी पाकिस्तानी आतंकियों को चेतावनी, निर्दोष मृतकों के लिए जताया हार्दिक शोक* *-भारत को ललकारा है,...