खाराखेत के व्यापक सौंदर्यीकरण व इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर प्रमुख वन संरक्षक से मिला प्रतिनिधि मण्डल

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देहरादून: खाराखेत के व्यापक सौंदर्यीकरण इसको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने,नन्दा की चौकी के पास “खाराखेत नमक सत्याग्रह स्मारक”का सूचना पट/भव्य प्रवेश द्वार बनाने,नन्दा की चौकी से खाराखेत स्मारक तक के मार्ग को “नमक सत्याग्रह मार्ग” रखने,यहां पेयजल योजना का विस्तार करने,यहां गर्मी वर्षा से बचने के लिए एक सेल्टर तथा पर्यटकों के लिए बैंचों का निर्माण करने,प्रतिवर्ष 20 अप्रैल को खाराखेत में “नमक सत्याग्रह मेला “का आयोजन करने,वृक्षारोपण द्वारा उपयुक्त उपयोगी पेड़ो का रोपण किया जाने समेत “खाराखेत नमक सत्याग्रह आन्दोलन*के विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने विषयक सुझावों के साथ प्रधान प्रमुख वन संरक्षक( हॉफ)रंजन मिश्रा से संयुक्त नागरिक संगठन का शिष्टमंडल मिला। वार्ता में हॉफ ने पर्यावरण संरक्षण हेतु जनसहयोग की अपेक्षा करते हुए सुझावों पर यथासंभव कार्यवाही का आश्वासन दिया।
सुझावों में उत्तराखण्ड के पर्वतीय सीमान्त गांवों में बुग्यालों की जैवविविधता को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र व इको जैव रक्षक समिति का गठन किए जाने,स्थानीय बेरोजगार युवकों को प्रतिनिधित्व दिया जाने, हिमालयी दुर्गम स्थानों तथा महत्वपूर्ण बुग्यालों में अधिक पर्यटकों को जाने पर रोक लगाने,बुग्यालों तथा उसके आस-पास के क्षेत्रों में घूमने वाले बाहरी पर्यटकों को पारम्परिक नियमों से अवगत कराने की भी मांग की गई है। पद्यश्री कल्याणसिंह रावत ने”हिमालपी निगरानी तन्य” विकसित किए जाने,राज्य के 1000 मी. से ऊपर स्थित चीड़ के पेड़ो पर 1980 से लगी प्रतिबन्ध को हटाने तथा उनके समुचित विकास के लिए वैज्ञानिक प्रबन्धन शुरु करने की पैरवी भी की गई है।
राज्य में आग लगने के सबसे बड़ा कारण चीड़ की ही पत्तियों (पिरुल) को बताते हुए राष्ट्रीपार्कों,अभयारण्यों से विदेशी घासों को हटाने की योजना बनाने,वन धारण क्षमता के अनुसार ही वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ाई या घटाई जाने की मांग के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने हेतु,जरूरी कदम उठाने की भी मांग की है।सुझावपत्र में राजीवगांधी क्रिकेट सौंपे गए पत्र में रायपुर स्टेडियम देहरादून के प्रवेश द्वार के समीप पीडब्लूडी विभाग द्वारा ट्रांसप्लांट किए गये सूखे पेड़ों के शमशान की जगह नये पौधों को रोपकर वन विकसित किए जाने पर भी जोर दिया गया है। शिष्टमंडल में ब्रि.केजी बहल,लै.कर्नल बीएम थापा,डॉ.राकेश डंगवाल,गिरीशचंद्र भट्ट,स्वामी एस चंद्रा, जगमोहन मेहंदीरता,अवधेश शर्मा,एम एस रावत,सुशील त्यागी,शेरसिंह, मुकेश नारायण शर्मा शामिल थे।

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