-शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता: *-पहलगाम घटना- हर हिन्दू खून के आँसू रोया था। भारत का कोई भी सैनिक नहीं चैन से सोया था*

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*-शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता “एक शाम साहित्य के नाम” में सीआईएसएफ के जवान रह चुके कवि अशोक कुमार जाखड़ ने पढ़ीं देशभक्ति रचनाएँ*

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की हरियाणा प्रदेश समिति एवंं फरीदाबाद जिला समिति के संयुक्त संयोजन में आयोजित होने वाली मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता “एक शाम साहित्य के नाम’ के मई 2026 माह के अंक में आमंत्रित साहित्यकार के रूप में झज्जर, हरियाणा निवासी सैनिक व शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ कवि अशोक कुमार जाखड़ ‘निःस्वार्थी’ रहे। कार्यक्रम की संयोजिका शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश सचिव सरोज कुमार ने श्री जाखड़ का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय दिया। उन्हें देश का वीर फौजी बताते हुए कार्यक्रम में उनके आगमन को गौरव का विषय बताया। कार्यक्रम की समन्वयक एवं शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने भी हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री निःस्वार्थी का शब्दवीणा के राष्ट्रीय मंच पर अभिनंदन किया। “एक शाम साहित्य के नाम” की संचालन प्रभारी कवयित्री रिया अग्रवाल ने सरस्वती वंदना से भेंटवार्ता प्रारंभ की।

बातचीत के दौरान श्री जाखड़ ने अपने जीवन के खट्टे-मीठे व कड़वे अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि वे सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) में रहते हुए देश की 37 वर्षों तक सतत सेवा कर चुके हैं। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान के रूप में उन्हें बिहार, बंगाल, यूपी, जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, आंध्रप्रदेश जैसे प्रदेशों में सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। राष्ट्र सेवा करने के साथ वे निरंतर साहित्य की सेवा भी करते रहे। वार्ताकार रिया अग्रवाल ने श्री जाखड़ से उनके नाम में संलग्न “निःस्वार्थी” शब्द के औचित्य पर प्रश्न पूछे। श्री जाखड़ से हिन्दी तथा हरियाणवी भाषाओं में कविताएँ सुनाईं। उन्होंने “कारगिल युद्ध”, बॉर्डर पर घुसपैठियों के आतंक, वर्तमान भारत की चुनौतियों, एवं पहलगाम में हुए नृशंस आतंकवादी हमले को चित्रित करती हुई रचनाएँ पढ़ीं। पहलगाम हिंसा के शिकार हुए निर्दोष हिन्दू परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना एवं सहानुभूति जताते हुए उन्होंने सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी भी जताई। उन्होंने भावविभोर होते हुए हृदयस्पर्शी गीत प्रस्तुत किया। कहा, “पहलगाम घटना, हर हिन्दू खून के आँसू रोया था। भारत का कोई भी सैनिक नहीं चैन से सोया था।”

अपने जीवन के सैन्य व साहित्यिक अनुभवों को साझा करते हुए श्री निःस्वार्थी ने भारतीयों को हिन्दी और हिन्द देश की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने का संदेश दिया। उन्होंने शब्दवीणा का हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष होने पर हर्ष जताते हुए कुछेक दूसरे साहित्यिक मंचों से भी अपने जुड़ाव की बात कही। स्वयं को एक साधारण परिवार से संबंधित बतलाते हुए श्री निःस्वार्थी ने कहा कि उन्होंने जीवन में पशु भी चराए, खेतों पर काम भी किया, देश की भी सेवा की, और साहित्य से भी अनवरत जुड़े रहे। वर्ष 1958 में जन्मे अशोक कुमार जाखड़ ने स्वयं को जीवन से संतुष्ट बतलाते हुए कहा कि अब तक उनकी 22 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। 13 साझा काव्य संकलनों में भी उनकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें विद्या वाचस्पति सम्मान भी प्राप्त हो चुका है।

श्री जाखड़ ने शब्दवीणा द्वारा किए जा रहे प्रशंसनीय कार्यों के लिए डॉ. रश्मि सहित समस्त शब्दवीणा परिवार को शुभकामनाएं दीं, संस्था के उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना की। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक पर शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर महावीर सिंह वीर, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, प्यारचन्द कुमार मोहन, सुरेश विद्यार्थी, अरुण अपेक्षित, डॉ विजय शंकर, डॉ परशुराम तिवारी भार्गव, सरिता कुमार, नंद किशोर जोशी, श्रवण सहस्त्रांशु, डॉ वीरेन्द्र कुमार, संतोष कुमार जयंत, प्रो. जयनाथ, अजय कुमार सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने भेंटवार्ता का आनंद उठाया।

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