प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक विकास को संजोकर आगे बढ़ना है : योग गुरू स्वामी रामदेव

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मालवीय घाट हर की पैड़ी पर जारी रहा गंगा के साथ साथ ज्ञान, धर्म का प्रवाह

हरिद्वार। हर की पैड़ी पर जारी श्रीमद्भागवत कथा में गंगा जी के प्रवाह के साथ योग का भी समन्वय देखने को मिला। पुरूषोत्म मास में पवित्र हर की पैड़ी के मालवीय घाट पर पवित्र गंगा के तट श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में मन्माध्व गौडेष्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने चौथे दिन श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए श्रद्वालु श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन योगगुरू स्वामी रामदेव ने पहुचकर व्यास गदद्ी की पूजा अर्चना की। योगगुरू स्वामी रामदेव ने भागवत कथा के आयोजन को सनातन की मजबूती की दिशा में बढ़ने के लिए एक आहूति है। स्वामी रामदेव ने कथा व्यास वैष्णवाचार्य पुण्डरी गोस्वामी के कथा वाचन की चर्चा करते हुए कहा कि हमेशा हमारी प्राचीन विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे है। उन्होने कहा कि हमारे तो डीएनए में ही देवत्व है,रामत्व,राधत्व,शिवत्व है,सनातन के शाश्वत सत्य सनिहित है। उन्होने कहा कि हमारे आचार- विचार,आहार,व्यवहार में हिन्दुत्व है। उन्होने कहा कि प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक विकास को संजोकर आगे बढ़ना है। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने योगगुरू का स्वागत करते हुए कहा कि मॉ गंगा सभी के लिए सुख समृद्वि लाये,योगगुरू का स्नेह हमेशा से मिलता रहा है। उन्होने कथा यजमान अमृतसर के अग्रवाल परिवार के साथ साथ सभी के लिए मंगलकामना मॉ गंगा से की। कथा व्यास गोस्वामी पुंडरीक जी ने अपने मधुर वाणी में श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया और धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से समस्त प्रजा भयभीत थी। देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया गया था। उसी कारागार में भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य रूप में जन्म लिया। कथा के दौरान जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं,बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा और धर्म का संदेश देने के लिए हुआ था। कथा के अंत में श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भजनों पर झूम उठे और भगवान श्रीकृष्ण की आरती में शामिल हुए। कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम,उपाध्यक्ष हनुमंत झा,स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि,समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान,उज्जवल पण्डित,प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्वालु श्रोता मौजूद रहे।

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