शिवम् सडाना ने हरिद्वार विधानसभा-25 में विधायक के लिए नए भाजपा चेहरे की मांग
शुरू किया अभियान — “कोई भी नया चेहरा, वही सरकार”
टिकट पैसे से नहीं, प्रदर्शन और क्षमता के आधार पर मिले
हरिद्वार: भारतीय गायक, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं रियल एस्टेट कंसल्टेंट शिवम् सडाना ने वर्ष 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार विधानसभा क्षेत्र-25 में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव की मांग उठाई है। अपनी उक्त बात रखते हुए प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष एवं संबंधित संगठनात्मक नेतृत्व से अपील की है कि आगामी चुनाव में उम्मीदवार चयन के दौरान क्षेत्र के विकास, जनसमस्याओं, प्रदर्शन, छवि, चरित्र और जनसेवा की क्षमता को प्राथमिकता दी जाए।
शिवम् सडाना ने कहा कि वे सनातन धर्म के मूल्यों और हिंदू एकता को मजबूत करने के लिए भी निरंतर कार्य करते रहे हैं। इसी उद्देश्य के साथ शिवम् सडाना ने अपना नया जन-जागरूकता अभियान “कोई भी नया चेहरा, वही सरकार” (Any New Face, Same Government) शुरू करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं की दावेदारी की बात यहाँ नहीं कर रहे हैं, कोई भी हो पर अब नया चेहरा हो, वर्तमान विधायक मदन कौशिक 25 साल पूरे कर रहे हैं अपनी एक तरफा विधायकी के लेकिन हरिद्वार के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र रानीपुर मोड़ और न्यू हरिद्वार में वर्षों से बनी जलभराव की समस्या का वे निदान नहीं करा सके हैं. बारिश के दौरान सड़कों और प्रमुख क्षेत्रों में पानी भरने से आम जनता, व्यापारियों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार की स्वच्छ, सुंदर और सम्मानजनक छवि बनाए रखना सनातन संस्कृति के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है।
सडाना ने कहा: “एक ही प्रतिनिधित्व इतने लंबे समय से रहने के बावजूद अगर जलभराव जैसी बुनियादी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है, तो जनता को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। हरिद्वार को विकास और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत है, न कि केवल आश्वासनों की।”»
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा के दौरान हरिद्वार की छवि और बुनियादी सुविधाओं को लेकर होने वाली चर्चाएं उन्हें व्यक्तिगत रूप से पीड़ा देती हैं। “जब मैं अपने शहर वापस आता हूं और अपने ही घर के सामने खराब जल निकासी के कारण पानी भरा हुआ देखता हूं, तो मुझे दुख होता है। जिस शहर में मेरा जन्म हुआ, उसकी बेहतर छवि और विकास के लिए आवाज उठाना मेरा अधिकार और कर्तव्य दोनों है।”»
शिवम् सडाना ने वर्तमान जनप्रतिनिधियों से जलभराव और ड्रेनेज की समस्या पर स्पष्ट जवाबदेही और समयबद्ध समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि लंबे समय तक किसी गंभीर जनसमस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है, तो उसे जनता के सामने जवाब देना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी पर विचार करना चाहिए। अब टिकट पैसे से नहीं, प्रदर्शन और क्षमता के आधार पर मिले
शिवम् सडाना ने राजनीतिक दलों से उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि टिकट पैसे के प्रभाव से नहीं, बल्कि प्रदर्शन, जनसेवा, योग्यता, ईमानदारी, छवि, चरित्र और जनता की समस्याओं को हल करने की क्षमता के आधार पर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा: “जनता का प्रतिनिधि वह होना चाहिए जो जनता की समस्याएं हल करने के लिए चुनाव जीते, न कि चुनाव पर किए गए खर्च की भरपाई करने के लिए। लोकतंत्र में धनबल से अधिक जनबल और जनसेवा का महत्व होना चाहिए।”»
सडाना ने कहा कि समाज को बांटने के बजाय हिंदू एकता, सामाजिक सद्भाव और सनातन मूल्यों को मजबूत करने वाला नेतृत्व चाहिए।
उन्होंने कहा कि नागरिक आयकर, वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगने वाले कर, ईंधन एवं सड़क से जुड़े करों तथा संपत्ति पंजीकरण के दौरान विभिन्न सरकारी शुल्कों के माध्यम से सरकार को योगदान देते हैं। इसलिए नागरिकों को बेहतर सड़कें, जल निकासी, यातायात व्यवस्था और मजबूत शहरी बुनियादी ढांचा मांगने का पूरा अधिकार है। सार्वजनिक जीवन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की तथा कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने सार्वजनिक दायित्वों और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शिवम् सडाना ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहतर प्रतिनिधित्व और जन-जवाबदेही के पक्ष में है। “मेरी बात बिल्कुल साफ है — सरकार वही रह सकती है, लेकिन प्रतिनिधि को उसके काम के आधार पर बदला जा सकता है। अगर जनता को लगता है कि एक नया, योग्य और ईमानदार चेहरा क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर ढंग से उठा सकता है, तो उस आवाज को सुना जाना चाहिए।”»
उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ सनातन धर्म, हिंदू एकता और भारत की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा भी समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।
