जीबीएम कॉलेज में इतिहास विभाग ने “गया जी एवं पितृपक्ष” विषय पर विशेष व्याख्यान का किया आयोजन
-आस्था, स्मृति, एवं तीर्थाटन का महान केन्द्र है पितृपक्ष महासंगम स्थल गया जी: प्रो मनीष कुमार सिन्हा*

गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में इतिहास विभाग एवं विभाग के ही “धरोहर क्लब” की ओर से आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में “गया जी एवं पितृपक्ष” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेष वक्ता के रूप में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ मनीष कुमार सिन्हा रहे। व्याख्यान का शुभारंभ प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल, मुख्य वक्ता प्रो सिन्हा, एवं मंचासीन प्रोफेसरों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। राष्ट्रगीत एवं महाविद्यालय कुलगीत की सुमधुर प्रस्तुति के उपरांत प्रधानाचार्या डॉ पटेल ने मुख्य वक्ता को पौधा, अंगवस्त्र, एवं महाविद्यालय की पत्रिका ‘गरिमा’ भेंट करके सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्या डॉ सीमा पटेल ने की तथा कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन इतिहास विभाग की सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर, धरोहर क्लब की संयोजक एवं आईक्यूएसी समन्वयक डॉ कृति सिंह आनंद ने किया। डॉ कृति ने विषय की रूपरेखा पर बिंदुवार प्रकाश डाला। उन्होंने गया जी को भारत के प्राचीनतम एवं सर्वाधिक पूजनीय तीर्थस्थलों में से एक बताया। इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका कुमारी ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया।
व्याख्यान के दरम्यान मुख्य वक्ता प्रो मनीष कुमार सिन्हा ने पितृपक्ष मेला महासंगम स्थल गया जी को आस्था, स्मृतियों एवं तीर्थ का महान केन्द्र बतलाया। उन्होंने गया जी में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पितृपक्ष मेले के ऐतिहासिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गया जी की पवित्रता को सविस्तार समझाते हुए कहा कि यहाँ किए जाने वाले अनुष्ठानों के ‘साक्षी’ साक्षात् गदाधर भगवान विष्णु माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि वायु पुराण, अग्नि पुराण एवं गरुड़ पुराण, तीनों गया के पितृतीर्थ के महत्त्व पर बल देते हैं। अग्नि पुराण में फल्गु को महान नदी कहा गया है।
प्रो मनीष कुमार ने बताया कि गया जी को पितृतीर्थ के रूप में जाना जाता है, जहाँ विशेषकर पितृ पक्ष में दिवंगत पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किया जाता है। इंटैक गया चैप्टर के चित्रित मोनोग्राफ के आधार पर उन्होंने गया जी की सभी पिंड वेदियों के बारे में बताया। विष्णुपद, फल्गु नदी, एवं अक्षयवट के अतिरिक्त 45 सक्रिय वेदियों के परिपथ, विष्णुपद मंदिर के षोडश वेदी मंडप की महत्ता पर चर्चा हुई़। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्या डॉ. सीमा पटेल ने धरोहर क्लब एवं इतिहास विभाग की इस पहल की सराहना की तथा छात्राओं को अपने नगर की विरासत से जागरूकता और गौरव के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कॉलेज की पीआरओ डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि गया जी में दिनांक 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चल रहे पितृपक्ष मेला महासंगम के अवसर पर “गया जी एवं पितृपक्ष” को समर्पित विशेष व्याख्यान का यह आयोजन अत्यंत सामयिक, ज्ञानवर्द्धक, विचारपूर्ण, एवं सारगर्भित रहा। छात्राओं ने बढ़चढ़कर इसमें भाग लिया तथा प्रो मनीष के व्याख्यान का लाभ उठाया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग की अतिथि प्राध्यापिका डॉ. रानी कुमारी ने किया। कार्यक्रम में डॉ सहदेब बाउरी, डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ पूजा राय, डॉ नगमा शादाब, डॉ अमृता कुमारी घोष, प्रीति शेखर, डॉ शबाना परवीन हुसैन, डॉ वीणा जायसवाल, डॉ सीमा कुमारी, डॉ प्यारे माँझी, डॉ आशुतोष कुमार पांडेय, डॉ अफ्शां नाहिद, डॉ विजेता लाल, डॉ फातिमा, डॉ प्रमिला कुमारी, डॉ रानी कुमारी सहित अनेक छात्राओं की उपस्थिति रही।
