अनुबंध की समय सीमा खत्म होने पर बेशकीमती 135 बीघा भूमि को राज्य सरकार में समाहित करने की मांग की

0


हरिद्वार। आवासीय परियोजना के लिए रोशनाबाद सिडकुल में दी गयी शेष बची भूमि को राज्य सरकार में समाहित करने की मांग कर रहे ग्रामीण राजेश कुमार चौहान ने आज प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में एक कंपनी पर फर्जी रूप से लोगों कोई सरकार की 135 बीघा भूमि के बैनामे करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा इस कंपनी के नाम यह भूमि तहसील के किसी अभिलेख में दर्ज नहीं हैं और जो बैनामे किए जा रहे हैं उनमें खसरा नंबर ही नहीं है जो जाहिर करता है यह बड़ा फर्जीवाड़ा है. वार्ता के समर्थन में कांग्रेस नेता वरूण बालियान व मुरली मनोहर ने कहा कि सरकार द्वारा तय की गयी शर्त के अनुसार आवासीय परियोजना के लिए दी गयी भूमि पर दो वर्ष के अंदर निर्माण कार्य पूरा किया जाना था। समय सीमा पूरी होने के बाद शेष बची 135 बीघा भूमि राज्य सरकार में समाहित किए जाने के लिए राजेश कुमार लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। सभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यदि लगता है कि राजेश कुमार की शिकायत निराधार है तो उसे खारिज कर दे और निर्माण कर रही संबंधित कंपनी के पक्ष में आदेश कर दे। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है और पूरा मामला लंबे समय से अटका हुआ है। इसी विषय को लेकर राजेश कुमार ने जिला मुख्यालय रोशना बाद में धरना भी दिया था जिसे हमने भी समर्थन दिया था क्योंकि यह उत्तराखंड राज्य की बेशकीमती भूमि है औऱ जनहित के कार्यों में प्रयोग की जा सकती है. उसे इस प्रकार से खुर्द बुर्द नहीं होने दिया जा सकता.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं वरूण बालियान और मुरली मनोहर ने कहा कि प्रशासन को नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए मामले का निस्तारण करना चाहिए। जनप्रतिनिधि भी जमीन के मामले में लिप्त हो सकते हैं इसलिए वह इस मामले में आगे नहीं आ रहे हैं, ऐसा लगता है कि कई लोग जमीन की इस बंदर बांट में शामिल हैं. वार्ता में प्रतिवादी रूहालकी किशनपुर निवासी राजेश कुमार चौहान ने कहा कि निर्धारित शर्त के अनुसार कंपनी को निर्माण के लिए दी गयी समय सीमा पूरी होने के बाद शेष बची 135 बीघा भूमि राज्य सरकार में समाहित की जानी चाहिए। लेकिन कंपनी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर भूमि पर प्लाटिंग और रजिस्ट्री की जा रही है। 135 बीघा भूमि को बचाने और राज्य सरकार में समाहित करने की मांग को लेकर वे 2023 से से संघर्ष कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन को इस संबंध में शीघ्रता से कार्रवाई करनी चाहिए और भूमि को सरकार में समाहित करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Share