*शब्दवीणा सृजन त्रिविधा में बिहार, मध्य प्रदेश, एवं हरियाणा के रचनाकारों ने किया काव्य पाठ*

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*-कर्नल गोपाल अश्क, कुमार कांत एवं सुशीला यादव ने पढ़ीं एक से बढ़कर एक रचनाएँ*

*-प्यासी है रे मन की मछरिया, भूल गया क्या घर की डगरिया*

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक सह सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा आयोजित “शब्दवीणा सृजन त्रिविधा” के गत अंक में गया जी से कवि कुमार कांत, इंदौर, मध्य प्रदेश से कवि कर्नल गोपाल अश्क एवं गुरुग्राम, हरियाणा से कवयित्री सुशीला यादव ने बतौर आमंत्रित रचनाकार अपनी रचनाएँ पढ़ीं। कार्यक्रम का संयोजन शब्दवीणा की संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। काव्य गोष्ठी का संचालन शब्दवीणा सृजन त्रिविधा प्रभारी कवयित्री कीर्ति यादव ने किया। उन्होंने आमंत्रित रचनाकारों का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय देते हुए दर्शकों एवं श्रोताओं का शब्दवीणा के राष्ट्रीय मंच पर स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुशीला यादव द्वारा प्रस्तुत स्वरचित सरस्वती वंदना “झंकृत हो तार मन के, झन झना झन बज उठे। माँ शारदा के आगमन पर, दीप बुझते जल उठे” से हुआ।

कवि कुमार कांत ने “हवा ने दी थपकियाँ उस द्वार पर, मैं पूछ बैठा, कौन हो” एवं “इसी गहन तम के उस पार, पंक्तिबद्ध दीपक मालाएँ, स्यात निकट हैं मेरे घर के” जैसी गंभीर विचारों वाली रचनाएँ पढ़ीं। शब्दवीणा मध्य प्रदेश संगठन मंत्री कवि कर्नल गोपाल अश्क ने मंच को अपनी वाक्पटुता व वाग्विदग्धता से ऊर्जा एवं जीवंतता से भर डाला। उन्होंने डॉ रश्मि एवं शब्दवीणा परिवार के सक्रिय साहित्यिक प्रयत्नों की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम में आमंत्रण हेतु आभार जताया। कर्नल के रूप में अपने अनुभवों एवं युवावस्था से ही साहित्य से अपने जुड़ाव की यादों को साझा किया। कर्नल अश्क ने श्रृंगार रस से ओतप्रोत “प्यासी है रे मन की मछरिया, भूल गया क्या घर की डगरिया। तुझ बिन सूनी लगे नगरिया। अब तो आजा मेरे संवरिया” रचना पढ़ी।

शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष कवयित्री सुशीला यादव ने “राज्यों में श्रेष्ठ हरियाणा, जहाँ दूध-दही का खाना। सीधे नर-नारी यहाँ के, और सीधा-साधा बाना” गीत सुनाकर खूब वाहवाहियाँ पायीं। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं कवयित्री कीर्ति ने अपनी रचना “कदम-कदम पर जीवन नयी परीक्षा लेता” के सुमधुर प्रस्तुतीकरण से काव्यगोष्ठी का समापन किया। कार्यक्रम का प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे देश के विभिन्न भागों से जुड़े साहित्यप्रेमियों ने काव्य पाठ का आनंद उठाया।

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