उत्तराखंड इंकलाबी मजदूर केन्द्र का सातवां केन्द्रीय सम्मेलन 4-5 अक्टूबर को त्रिमूर्ति नगर ज्वालापुर में

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The soul of india, Belwal

हरिद्वार, उत्तराखंड इंकलाबी मजदूर केन्द्र का सातवां केन्द्रीय सम्मेलन 4-5 अक्टूबर 2025 को राज महल बैंकट हाल निकट दिक्षा राइजिंग स्टार पब्लिक स्कूल निकट त्रिमूर्ति नगर ज्वालापुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में आयोजित होगा।
आज यहां प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित प्रेस वार्ता में रोहित रुहेला, महासचिव: इंकलाबी मजदूर केंद्र ने आयोजन के विषय में विस्तार चर्चा की, प्रमुख बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन में विगत तीन वर्षों में देश दुनिया में घटे घटनाक्रमों का मजदूर- ‌मेहनतकशों के जीवन पर पड़ रहें प्रभावों पर गम्भीरता से विचार विमर्श करते हुए अंतर्राष्ट्रीय व‌ राष्ट्रीय रिपोर्ट पास होगी। साम्राज्यवादी और पूंजीवादी सरकारों द्वारा मजदूरों – मेहनतकशों के खिलाफ रची जा रही साजिशों के खिलाफ विभिन्न प्रस्ताव लिये जायेंगे।

सम्मेलन के प्रतिनिधियों द्वारा अगले तीन साल के लिए संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव किया जायेगा।

5 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद खुला सत्र आयोजित होगा। जिसमें विभिन्न ट्रेड यूनियनों/सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी प्रतिभाग करेंगे।
लगभग 4 बजे से एक जुलूस का आयोजन होगा।

पदाधिकारियों ने प्रेस को बताया कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया भर में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग के इशारे पर सरकारों द्वारा मजदूर मेहनतकश जनता के श्रम और नागरिक अधिकारों पर भीषण हमले किये जा रहे हैं। सरकारों द्वारा हम मजदूरों और आम जनता के सभी हिस्सों के खिलाफ कठोर नीतियां बनाकर हमारे अधिकारों को कुचला जा रहा है।
इसी कड़ी में भारत में अडानी-अम्बानी जैसे बड़े पूंजीपतियों के हित में भाजपा-आरएसएस की मोदी सरकार द्वारा मजदूरों के खिलाफ चार नई श्रम संहिताओं को पारित करके हम मजदूरों को पूंजीपतियों का बंधुवा गुलाम बनाने के काले दस्तावेजों पर अपनी मुहर लगा दी है। हम मजदूरों और आम जनता के खिलाफ तीन आपराधिक कानूनों सहित अन्य भांति-भांति के काले कानून बनाकर हमारे संघर्षों को दबाने की साजिश की जा रही है।

ये चारों श्रम संहिताएं हम मजूदरों के खून-पसीने की कमाई को और अधिक निचोड़ने, ट्रेड यूनियन बनाने, हड़ताल व आंदोलन करने के हमारे संविधान प्रदत्त अधिकारों को छीनने की गहरी साजिश है। इन संहिताओं के लागू होने पर हमारी मेहनत, हमारा हक और हमारा भविष्य दांव पर लग जायेगा। इन संहिताओं के लागू होने पर 8 घण्टे की शिफ्ट में काम करने का अधिकार छिन जायेगा, नौकरी की सुरक्षा खत्म हो जायेगी; आसान छंटनी और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और स्थाई नौकरियों का एक तरह से अंत हो जायेगा। हड़ताल करने और संगठन बनाने के अधिकारों पर पाबंदी लग जायेगी। पी एफ, ई एस आई, पेंशन, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जायेगी। इन श्रम संहिताओं में महिला मजदूरों की सुरक्षा, परिवार और जीवन के साथ में खिलवाड़ करके उनसे रात्रि शिफ्ट में काम कराने की खुली छूट दे दी गई है।

हम मजदूर अपने और अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने को मोदी सरकार द्वारा रची जा रही उपरोक्त साजिश के खिलाफ एक वर्ग के रूप में एकजुट होकर संघर्ष ना छेड़ दें, इसीलिए हमें धर्म-जाति के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर व हिन्दू-मुसलमान के नाम पर बांटकर हमारी एकता और संघर्ष को कमजोर किया जा रहा है।

मोदी राज में देशभर में हजारों हजार सरकारी स्कूलों को बंद करके हमारे बच्बों से शिक्षा हासिल करने का अधिकार छीना जा रहा है। राजस्थान में सरकारी स्कूल की छत गिरने से मारे गए 7 से 10 वर्ष के मासूम बच्चों की रूहें चीख-चीख कर कह रही हैं कि संघ भाजपा के इस रामराज्य में मजदूरों और आम जनता के बच्चों के जीवन और शिक्षा के अधिकार का कोई भी मोल नहीं है। अंकिता भंडारी, नर्स तसलीम जहां सहित पीड़ित बच्चियों के परिजन चीख-चीख कर कह रहे हैं कि मोदीराज में मजदूरों, गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यक जनता की बेटियों और महिलाओं के बलात्कारियों और हत्यारों को सजा और न्याय मिलने की उम्मीद करना बेमानी है।‌ देश के अन्नदाता किसानों ने मोदी सरकार द्वारा पास तीन काले कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए 13 महिने के जुझारू संघर्ष में 700 किसानों ‌ने अपनी शहादत दी ।बेरोजगारों को सम्मानजनक व गरिमामय रोजगार देने के स्थान पर उल्टा भारी भरकम फीस लेकर आय दिन पेपर लीक कर देश के नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। निजी और सरकारी संस्थाओं में ठेकेदारी प्रथा के तहत व संविदा पर नियुक्ति की जा रही है सेना में भी 4 साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती करके नवयुवकों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है।

मोदी सरकार द्वारा अपने फासीस्ट एजेंडे के तहत देश के अल्पसंख्यकों को एन आर सी‌,सी‌‌ ए ए ,लव‌ जिहाद,लैंड जिहाद एवं गौसुरक्षा के नाम पर आतंकित कर फर्जी मुकदमे लगाकर जेलों में बंद किया जा रहा है व फर्जी एनकाउंटर में मारा जा रहा हैं। आदिवासियों को उजाड़ कर जल जंगल व जमीन व खनिज सम्पदा को अडानी और अंबानी जैसे पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है।

दुनिया भर के साम्राज्यवादियों द्वारा बनाए गये वैश्विक संस्थाओं द्वारा वैश्वीकरण उदारीकरण और निजीकरण की जन विरोधी नीतियों के माध्यम से गरीब देशों की मजदूर -मेहनतकशों का शोषण करके वैश्विक लूट की जा रही है।
साम्राज्यवादियों का सरगना अमेरिका आज अन्यायपूर्ण युद्ध थोप रहा है।इजराइल द्वारा अमेरिकी साम्राज्यवादियों की मदद से गाजा में किये जा रहे नरसंहार और राहत कैम्प में भोजन पाने की उम्मीद में लाइन में खड़े भूखे-प्यासे बच्चों को हर दिन गोलियों से भूने जाने की वीभत्स घटनाओं के विरोध में सारी दुनिया में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं ।
इंकलाबी मजदूर केंद्र ‌इन‌‌ अन्यायपूर्ण युद्धों का विरोध करता है।सातवां केन्द्रीय सम्मेलन की
हमारी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं –

*‌ पूंजीवाद साम्राज्यवाद और हिन्दू फासीवाद का नाश हो।

*अमेरिकी इजराइली गठजोड़ द्वारा फिलिस्तीनी जनता के कत्लेआम के विरुद्ध आवाज उठाओ। भारत सरकार इजराइल के साथ अपने संबंध खत्म करो।

*उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण की नीतियां रद्द करो। शिक्षा-स्वास्थ्य और सार्वजनिक उद्यमों का निजीकरण बंद करो।

*मजदूर विरोधी नई श्रम संहिताएं निरस्त करो।

*तीन आपराधिक कानूनों सहित आम जनता के खिलाफ बनाये गए सभी काले कानून निरस्त करो।

*ठेका प्रथा पर रोक लगाओ। FTE, नीम, कैजुअल सहित स्थायी कामों पर नियोजित सभी अरथाई व ठेका मजदूरों को तत्काल स्थाई करो।

*न्यूनतम वेतनमान 30 हजार रूपये मासिक घोषित करो।

*महिला मजदूरों से रात की पाली में काम कराने के काले कानून को तत्काल निरस्त करो।

*मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने और संगठित होने के संविधान प्रदत्त अधिकारों का दमन करना बंद करो।

*8 घंटे कार्यदिवस के अधिकारों पर हमले नहीं सहेंगे। विज्ञान और तकनीक के विकास के मद्देनजर 6 घंटे का कार्यदिवस घोषित करो।

*मर्जर के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति पर तत्काल रोक लगाओ। आम जनता के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित करने की साजिश नहीं चलेगी।

*शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मौलिक अधिकार घोषित करो।

*बिना किसी भेदभाव सभी को एकसमान और निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराओ।

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