*शब्दवीणा के सेवक स्मृति सम्मान समारोह एवं काव्यांजलि में बही कविताओं की सरिता*
*- शब्दवीणा द्वारा आमंत्रित कवि-कवयित्रियों को सेवक स्मृति सम्मान 2025 से किया गया विभूषित।*

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की उत्तर प्रदेश समिति एवं बरेली जिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यकार स्वर्गीय रामसेवक त्रिगुणायत सेवक की स्मृति में बरेली के लोक खुशहाली सभागार में “सेवक स्मृति सम्मान समारोह एवं शब्दवीणा काव्यांजलि” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सैनी मुकुंद, कार्यक्रम के सूत्रधार शब्दवीणा उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष उमेश त्रिगुणायत, प्रदेश साहित्य मंत्री सीमा मौर्य शैली , शब्दवीणा बरेली जिला संरक्षक हिमांशु श्रोतिय निष्पक्ष, जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्निहोत्री सहित समिति के सभी पदाधिकारियों की देखरेख में हुआ। दीप प्रज्ज्वलन से समारोह का शुभारंभ हुआ। माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र प्रदान करके आमंत्रित रचनाकारों का स्वागत किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य देवेन्द्र देव सहित सभी कवि-कवयित्रियों को सेवक स्मृति सम्मान 2025 से विभूषित किया गया गया।

शब्दवीणा काव्यांजलि में उमेश त्रिगुणायत, सीमा मौर्या शैली, हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष”, अभिषेक अग्निहोत्री, कुमार कौशल, उपमेन्द्र सक्सेना, उन्नति राधा शर्मा, मनोज सक्सेना मनोज, नेहा मिश्रा, पुष्पेन्द्र मोहन शुक्ल दीप, यूनूस चिश्ती, डॉ मुकेश मीत, शैलेन्द्र मिश्र देव, सोहिल बरेलवी, गोपाल पाठक कृष्णा, प्रियांशु त्रिपाठी, पीयूष गोयल बेदिल, सुनील शर्मा समर्थ, अमित मनोज, पीयूष शर्मा, दीप्ति सक्सेना दीप, कुलदीप कल्प, राजवाला धैर्य, सत्यवती सिंह सत्या, मनोज दीक्षित टिंकू, शालिनी शर्मा, अचिन मायूस ने एक से बढ़कर एक गीत, ग़जल, दोहे, मुक्तक, छंद पढ़े। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर देश भर के साहित्यानुरागी दर्शकों व श्रोताओं ने काव्यपाठ का आनंद उठाया।
हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष” की “यकीं आता नहीं केवल नज़ारों की गवाही पर, सुना है कान भी अक्सर नज़र को बरगलाते हैं”, अरुण दीक्षित ‘अनभिज्ञ’ की “संबंधों के जटिल प्रश्न थे, हल थे हमको ज्ञात नहीं। दिल की बातें कहने के भी, रहे कभी हालात नहीं। ख़ामोशी ने धीरे-धीरे, हर एहसास मिटा डाला, अब कोहराम मचे कितना भी, दिल मे जब जज्बात नहीं”, सीमा मौर्य शैली की ‘हमें गुमनामियां मंजूर है पहचान तुम रख लो ,भले दो श्राप हिस्से में सभी वरदान तुम रख लो,दिखावे के लिए इंसानियत ओढ़े हुए लोगो, अगर कुछ शर्म है तुम में सही ईमान तुम रख लो। संजय पाण्डेय गौहर की “वो जो रहता है पशोपेश में किस्मत की असीर। अपने हाथों की लकीरों में भला क्या देखे” जैसी पंक्तियाँ सुनकर दर्शक भाव विभोर हो उठे। अभिषेक अग्निहोत्री की “तुम मिले तो हो, मगर इस बात का भी मान रखना, तुमसे मिलने में मेरी बरसों की तनहाई गई है” तथा राजेश शर्मा ने “हिंदू मुस्लिम के झगडों का क्या कोई उपचार नहीं। भारत मां की संतानों में क्यों आपस में प्यार नहीं” रचनाएँ पढ़ कर खूब प्रशंसा लूटी।
आनंद पाठक की “महफ़िल में अपने दर्द को गाते हैं शौक़ से। हम जैसे लोग हिज़्र मनाते है शौक से”, शैलेन्द्र मिश्र देव की “अभी जो कर रहे हैं, कल अनोखे पल बनेंगी। हमारी आदतें ही तो हमारा कल बनेंगी”, दीप्ति सक्सेना की “मयस्सर है नहीं मोहलत, मोहब्बत किस तरह कीजै। निगाह-ए-नाज़ है रूठीं, नज़ाकत किस तरह कीजै”, पीयूष शर्मा की “दुख के बादल सुख के दर पर मोड़ दिये। टूटे रिश्तों के सब धागे जोड़ दिये। नाम तुम्हारा आया जब भी होंठों पर, हमने दुनिया-भर के क़िस्से छोड़ दिये”, यूनुस चिश्ती की “हमें वादा निभाना है हमारा, हमें ये ज़िंदगी जीनी पड़ेगी” एवं पीयूष गोयल ‘बेदिल’ की “किसी के साथ न देने पे क्यों करूँ शिकवा, मैं ख़ुद के साथ नहीं देखता कभी ख़ुद को” पर खूब वाहवाहियाँ लगीं।प्रियांशु त्रिपाठी की “दर्द में मुस्कुराना बड़ी बात है, जीतकर हार जाना बड़ी बात है”, अभिषेक शर्मा की “मैं दिल के जज्बात पिरोता हूँ, तुमको सब कॉपी कट पेस्ट कहानी लगती है”, पुष्पेंद्र शुक्ल ‘दीप’ की “मैं मुक़द्दर तुम्हारा बन न सका, बन के मेरा नसीब आ जाओ”, डॉ. मिथिलेश राकेश ‘मिथिला’ की “हसरत चुकी हुई है दीवानगी, न पूछो सूखी हुई नदी से अरज़ी लगा रहे हैं” एवं डॉ मुकेश ‘मीत’ की “आप जब आ के पास बैठ गए। जाने क्यों ग़म में उदास बैठ गए” को भी दर्शकों और श्रोताओं की खूब वाहवाहियाँ मिलीं।
