दीपावली पर उल्लू की बलि देने वाले सावधान, वन विभाग की रहेगी कड़ी नज़र

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देहरादून। दिपावली पर्व आते ही मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू की शामत आ जाती है। इस दौरान लोग रात-रात को जंगल से लेकर उन ठिकानों में उन्हें ढूंढते हैं, जहां उल्लू होने की संभावना होती है। कई जगह देखा जाता है कि अवैध पक्षी बाजार में दीवाली से महीने भर पहले से ही उल्लू की मांग कुछ जरूरत से ज्यादा ही बढ़ने लगती है। इस काले बाजार में उनके दाम हजारों तक चले जाते हैं।
दरअसल, कुछ लोग मानते हैं कि दीवाली की रात काली रात होती है। इस रात बड़े पैमाने पर उल्लू की बलि देते हैं, तो शुभ मानते हैं। लेकिन इससे सावधान हो जाएं, क्योंकि वन विभाग इस तरह की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर रखेगा।
कुछ लोग मानते हैं कि मां लक्ष्मी उल्लू की सवारी करती हैं, वहीं यह भी कहा जाता है कि उलूकराज लक्ष्मी के साथ ही नहीं चलते हैं, सवारी तो वो हाथी की करती हैं। भले ही मान्यताएं चाहे जितनी अलग हो, लेकिन दीवाली से उल्लुओं का गहरा संबंध जुड़ गया है। क़ई लोग मानते हैं कि दीवाली के रोज उल्लू की बलि देने से लक्ष्मीजी हमेशा के लिए घर में बस जाती हैं।
वहीं उल्लुओं का धन-समृद्धि से सीधा संबंध या शगुन-अपशगुन को लेकर ढेरों किस्से-कहानियां ग्रीक और एशिया के देशों में प्रचलित भी हैं। मुश्किल परिस्थितियों में आखिरी वक्त तक सर्वाइव कर पाने वाला ये पक्षी अपनी इसी विशेषता के कारण पुराणों के अनुसार तंत्र साधना के लिए सबसे उपयोगी माना गया है, इसलिए कुछ लोग दिवाली पर इसकी बलि देते हैं।
प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा ने कहा कि दिवाली का त्यौहार रोशनी और खुशियों का त्यौहार है, लेकिन कई मामलों में देखने के लिए मिलता है कि लोग अंधविश्वास और अज्ञानता के चलते उल्लू की बलि देते हैं। लेकिन इस बार उत्तराखंड वन विभाग ने इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए प्रदेशभर में अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने कमर का कस ली है और सभी वन प्रभागों को निर्देश दिए गए हैं कि दिवाली के दौरान रात्रिकालीन गश्त को बढ़ा दिया जाए, विशेषकर उन जंगलों और बाजारों में नजर रखी जाए। जहां वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त होती है।
विभाग ने ग्रामीणों, वन पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों से भी अपील कर रहा है कि अगर उल्लू या अन्य वन्यजीवों के शिकार की खबर किसी को कहीं मिलती है या कोई ऐसा करता पाया जाता है, तो तत्काल ही वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने धरातल पर काम करने वाले सभी वन कर्मियों को सक्रिय रहकर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग और पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ-साथ लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूक में किया जा रहा है। अगर उल्लू या किसी भी वन्य जीव के शिकार को करता हुआ कोई व्यक्ति पाया गया तो उसे पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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