नवरात्रि, नवचेतना, नवसंकल्प और नवप्रेरणा का पर्व : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

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*🌺नवरात्रि के प्रथम दिन उत्तराखंड़ आपदा पीड़ितों के लिये विशेष प्रार्थना व यज्ञ*
*✨नवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में स्टेम सेल थैरेपी कैम्प का शुभारम्भ*
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ऋषिकेश। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व, माँ दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का अवसर है। नौ दिवसीय इस महोत्सव को परमार्थ निकेतन में सेवा अनुष्ठान के रूप में समर्पित किया। नवरात्रि के अवसर पर मां हमें स्मरण कराती है कि जब-जब संसार में अंधकार, दुर्बलता और दुःख छाते हैं, तब शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा आशा और साहस का संचार करती हैं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर, परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में स्टेम सेल थैरेपी कैंप का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। यह कैंप आधुनिक विज्ञान और सनातन संस्कृति की सेवा-परंपरा का संगम है। हमारी ऋषि परंपरा ने सदैव स्वास्थ्य को धर्म का प्रथम आधार माना है। शास्त्रों में कहा गया है शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् अर्थात् धर्म और कर्तव्य पालन के लिए स्वस्थ शरीर ही प्रथम साधन है। यही भाव इस कैंप की नींव में है।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में उत्तराखंड की आपदा पीड़ितों की आत्मा की शान्ति व पीड़ित परिवारों की सुख समृद्धि हेतु विशेष प्रार्थना की गयी। स्वामी जी ने कहा कि इस बार उत्तराखंड़ में प्राकृतिक आपदा ने जीवन और घर-परिवार को गहरी चोट पहुँचाई है। मां से प्रार्थना हैं कि प्रभावित परिवारों को शक्ति, साहस और संबल प्रदान करे तथा प्रदेश शीघ्र पुनर्निर्माण की राह पर अग्रसर हो।
स्वामी जी ने कहा कि आज नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री के दिव्य दर्शन से जीवन में शांति, संतुलन और निर्मलता का संचार होता है। यह पर्व केवल आराधना ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आंतरिक शुद्धि का भी अवसर है। वर्ष में दो बार आने वाली नवरात्रि ऋतु परिवर्तन के साथ हमें शरीर, मन और आत्मा को सशक्त बनाने की प्रेरणा देती है।

नवरात्रि की नौ रातें हमारे जीवन के तीन गुणों की यात्रा हैं, तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण। पहले तीन दिन माँ दुर्गा की उपासना तमोगुण का नाश करती है। अगले तीन दिन माँ लक्ष्मी की आराधना रजोगुण को संतुलित करती है। अंतिम तीन दिन माँ सरस्वती की पूजा सतोगुण को जागृत करती है।
यह पर्व अज्ञान से ज्ञान की ओर, असंतुलन से सामंजस्य की ओर और दुर्बलता से शक्ति की ओर बढ़ने की आध्यात्मिक साधना है। आइए इस नवरात्रि शक्ति का पूजन करें, शांति की स्थापना करें, स्वयं को सशक्त करें और राष्ट्र को समृद्ध बनाएं।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि स्टेम सेल थैरेपी कैंप केवल चिकित्सा का केंद्र नहीं, बल्कि नयी आशा का दीपक है। आधुनिक विज्ञान की प्रगति और प्राचीन दर्शन की करुणा जब एक साथ आती है, तो समाज के लिए अमृत बन जाती है।
इस कैंप का उद्देश्य रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को केवल उपचार देना नहीं, बल्कि जीवन में नयी ऊर्जा, नयी प्रेरणा और नयी दृष्टि देना भी है। कैंप के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बीमारी केवल शरीर की स्थिति नहीं है, बल्कि मन और आत्मा की स्थिति से भी जुड़ी है इसलिए यहाँ उपचार केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की दिशा में भी किया जाना जरूरी है।
डाॅ. सुनीता राणा अग्रवाल, आर. अग्रवाल हॉस्पिटल्स एवं जीन रिसर्च फाउंडेशन, बैंगलोर और उनकी टीम ने इम्यून बूस्टर स्टेम सेल इंजेक्शन लगाकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा प्रदान की।

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