*शब्दवीणा के तृतीय स्थापना दिवस पर ‘राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं पुस्तक लोकार्पण’ समारोह का हुआ आयोजन*
*- कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित की गीत नाटिका ‘बुंदेला हरदौल’ का हुआ अविस्मरणीय लोकार्पण*
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा 30 मार्च को मनाए जा रहे तृतीय स्थापना दिवस समारोह के तहत शब्दवीणा की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रश्मि प्रियदर्शनी के निर्देशन तथा समन्वयन में शब्दवीणा की राष्ट्रीय समिति द्वारा “राष्ट्रीय कवि सम्मेलन-सह-पुस्तक लोकार्पण” का आयोजन हुआ, जिसका संयोजन शब्दवीणा की बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा एवं झारखंड प्रदेश समितियों ने संयुक्त रूप से किया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं शब्दवीणा गीत से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दवीणा मध्य प्रदेश सचिव वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित ने की। कार्यक्रम का संचालन शब्दवीणा सृजन त्रिविधा प्रभारी हरियाणा की कवयित्री कीर्ति यादव ने किया। कवि सम्मेलन के दरम्यान मंचासीन रचनाकारों की उपस्थिति में कार्यक्रम अध्यक्ष अरुण अपेक्षित की गीत नाटिका लोक आस्था के नायक ‘बुंदेला हरदौल’ का अविस्मरणीय लोकार्पण हुआ। पुस्तक ‘बुंदेला हरदौल’ में बुंदेलखंड के लोकनायक लाला हरदौल के जीवन, त्याग, वीरता, लोक विश्वासों को नाटकीय शैली में प्रस्तुत किया गया है। श्री अपेक्षित ने पुस्तक में संकलित कुछ विशिष्ट काव्यात्मक संदर्भों को सुमधुर स्वर में गाकर सुनाया। गीत नाटिका से “आपका प्रतिबिंब पूनम चाँद का, है हृदय की झील दर्पण-सी यहाँ” जैसी पंक्तियाँ सुन श्रोतागण भावविभोर हो उठे।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल से प्रदेश अध्यक्ष राम नाथ बेख़बर, प्रदेश उपाध्यक्ष हीरा लाल साव, एवं राष्ट्रीय परामर्शदाता एवं पश्चिम बंगाल प्रदेश संरक्षक पुरुषोत्तम तिवारी, बिहार से गया जिला अध्यक्ष जैनेन्द्र कुमार मालवीय, डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, राष्ट्रीय उप संगठन मंत्री पंकज मिश्र, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश विद्यार्थी, एवं युवा कवयित्री दीपशिखा मिश्रा, कर्नाटक से प्रदेश अध्यक्ष सुनीता सैनी गुड्डी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेन्द्र सैनी, झारखंड से कवयित्री शालिनी नागर एवं श्री ठाकुर, मध्य प्रदेश से प्रदेश सचिव अरुण अपेक्षित एवं प्रदेश संगठन मंत्री कर्नल गोपाल अश्क़, उत्तर प्रदेश से मथुरा जिला अध्यक्ष राम देव शर्मा राही, उत्तर प्रदेश सचिव राज कुमार शर्मा एवं प्रवक्ता रमेश कुमार, हरियाणा से प्रदेश सचिव सरोज कुमार एवं कीर्ति यादव की गरिमामय उपस्थिति रही। रचनाकारों ने विविध विषयों पर एक से बढ़कर एक गीत, ग़ज़ल, छंद, मुक्तक और दोहे पढ़े। राम नाथ बेख़बर की “मैं हमेशा जिंदगी की धार से लड़ता रहा” एवं “कहीं बोलना है कहीं बोलते हैं, जहाँ बोलना है, नहीं बोलते हैं” जैसी ग़ज़लों पर खूब वाहवाहियाँ लगीं। कार्यक्रम अध्यक्ष अरुण अपेक्षित एवं मुख्य अतिथि पुरुषोत्तम तिवारी ने सभी को शब्दवीणा के तृतीय स्थापना दिवस की हार्दिक बधाइयाँ दीं। सभी ने शब्दवीणा परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से हुआ, जिससे जुड़कर महावीर सिंह वीर, पी.के.मोहन, डॉ वीरेन्द्र कुमार, डॉ शिव प्रकाश दास, अशोक राय वत्स, सुनील कुमार उपाध्याय, डॉ रवि प्रकाश, डॉ विजय शंकर, विनोद बरबिगहिया आदि अनेक साहित्यानुरागियों ने अपनी टिप्पणियों से प्रतिभागियों का उत्साहवर्द्धन किया। कार्यक्रम का समापन पावन शांति पाठ से हुआ।
