पौड़ी में गुलदार द्वारा एक बच्ची की हत्या के बाद घंटाघर में प्रदर्शन हुआ

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‘गुलदार से गाँव बचाओ’ ढोल बजाकर घंटाघर में धाद ने लगायी गुहार

देहरादून। पौड़ी के पोखड़ा इलाके के श्रीकोट गांव में एक गुलदार ने चार वर्षीय मासूम बच्ची रिया की हत्या के विरोध में धाद और फ़ील गुड ट्रस्ट द्वारा रोष प्रकट करते हुए रोष प्रदर्शन किया गया। जिसमे पहाड़ में हो रहे निरन्तर वन्य जीव संघर्ष के बावजूद शासन की अकर्मण्यता के खिलाफ महिला साथी शांति बिंजोला अम्बिका उनियाल द्वारा ढ़ोल दमाऊ बजाकर विरोध जाहिर किया गया। सभा का सञ्चालन प्रदर्शन के संयोजक नीलेश नेगी ने किया जिसमें फील गुड ट्रस्ट के मांगपत्र का सभा में वाचन किया गया कि जंगली जानवरों से किसी व्यक्ति की मृत्यु पर 25 लाख रूपये का मुआवजा और अभिभावक की मृत्यु की दशा में परिवार को वैकल्पिक रोजगार दिया जाय। घायल व्यक्ति और पशु हानि की दशा में पूर्ण इलाज और क्षतिपूर्ती मुआवजा दिया जाए।
मनरेगा के अंतर्गत प्राथमिकता में मुख्य मार्ग एवं विद्यालय जाने के रास्ते के दोनों तरफ झाड़ियाँ साफ करवाई जाए। गांवो के आस-पास 100 मी. के अन्दर हर खेत को आबाद करवाया जाए और कोई भी कुकाट,कालाबांस घास, गाजर घास, और अन्य जंगली झाड़ी को साफ करवाया जाए। प्राथमिकता के आधार पर संवेदनशील गांवों में जालीनुमा तार से ग्राम सुरक्षा घेर बाड़ लगाई जाए।वन विभाग को उनके अधिकृत क्षेत्र में पर्याप्त पिंजड़े उपलब्ध करवाए जाएं। बाघ/गुलदार आदि की गणना करवाई जाए और उन पर कॉलर आईडी लगवाई जाए ताकि नरभक्षी की गफलत अन्य वन्य जीव न मारा जाए तथा नये शावकों को भी गिनती हो सकें। वनाग्नि और अपने खेत के अलावा किसी अन्य जगह पर आग लगाने वाले को कम से कम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान हो। AI आधारित प्राथमिक चेतावनी प्रणाली और सेंसर व लाइट आधारित उपकरण का प्रयोग हो। ड्रोन तकनीक से गुलदार की निगरानी की जाय
प्रदर्शन में धाद की और से लोकश नवानी और ने प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए समस्या के त्वरित समाधान और रोकथाम की मांग की। प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए पोखड़ा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्त्ता कविंद्र इस्टवाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा की पहाड़ में ग्रामीण जानवरो से अपनी सुरक्षा के लिए हथियार का प्रयोग नहीं कर पा रहे है और वो उनके परिजनों को निवाला बना रहे है. सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन मेहंदीरत्ता ने कहा वन विभाग में बजट अन्यत्र खर्च हो रहा है लेकिन जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा का सवाल है वहां लापरवाही बरती जा रही है। उत्तराखंड आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती ने कहा की इस मांग को शासन के दरवाजे तक ले जाने की जरूरत है और इस पर प्रदर्शन को अगले स्तर पर उठाना होगा। संयुक्त नागरिक संगठन के सुशील त्यागी ने कहा कि जन्मदिन पर किसी बच्ची का शोक हृदय विदारक है और बार बार हो रही इस तरह की घटनाओं से सामाजिक रोष उत्पन्न हो रहा है। सभा में धाद की और से डी सी नौटियाल ने कहा कि इस सवाल पर धाद पिछले वर्ष से लगातार समाज और शासन में ध्यान आकृष्ट कर रही है उन्होंने कहा कि धाद इसके दीर्घकालिक समाधान के साथ हम इस तार्किक परिणति तक ले जाने के लिए वचनबद्ध है।
इस अवसर पर अवधेश शर्मा, सुरेन्द्र सिंह रावत, दिनेश भंडारी, किशन सिंह, सुशील कुमार, , गणेश उनियाल,आशा डोभाल, चन्द्र भागा शुक्ला,अशोक जोशी, विजय जोशी, नरेन्द्र सुन्द्रियाल, उमेश्वर सिह रावत, अजीत सिंह गुसाईं, पंकज सुन्दरियाल, कुलदीप रावत, कैलाश लखेड़ा, मोहन सती, सुमन ढौंडियाल, नरेन्द्रपाल, अनिल जुयाल, प्रकाश नांगिया, तन्मय ममगाईं, शांति प्रकाश जिज्ञासु,हिमांशु आहूजा, दीपक सुन्द्रियाल, गुणानंद जखमोला आदि मौजूद रहे।

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