*शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश समिति की मासिक काव्यगोष्ठी में समसामयिक विषयों पर पढ़ी गयीं रचनाएँ*
*-मैं अंधेरों में, उजाले खोजता हूँ* *-चले आना तुम, जब आयेगा सावन* *-नयी ऊँचाइयों पर शब्दवीणा को धरेंगे सब* गया...
*-मैं अंधेरों में, उजाले खोजता हूँ* *-चले आना तुम, जब आयेगा सावन* *-नयी ऊँचाइयों पर शब्दवीणा को धरेंगे सब* गया...
*-लंदन की धरती पर शब्दवीणा द्वारा गायी गयी हिन्द और हिन्दी की गुणगाथा : डॉ. रश्मि* *-योग्यता काम आयी सदा,...
ऐसे समय में जब विभाजन गहरा रहे हैं और सद्भाव की बजाय नफ़रत ज़्यादा ज़ोर पकड़ रही है, कांवड़ यात्रा...
*अनवरत जारी रहेगी शब्दवीणा की साहित्यिक यात्रा - पुरुषोत्तम तिवारी* *-बहकी-बहकी पुरवैया है, सावन का मस्त महीना है* *-कोई गाता...
बालासोर जिले के फकीर मोहन कालेज काण्ड ने व्यवस्था-तंत्र की संवेदनशीलता और कार्यपालिका की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया...
भारत में राजनीतिक विमर्श अक्सर विभाजनकारी और ध्रुवीकरणकारी विचारों के इर्द-गिर्द घूमता रहता है, एक शांत सांस्कृतिक क्रांति भी हो...
*-बादलों के पंख लेकर, नाचता मन आज मेरा* *-मर्यादा में पले प्रेम ने कभी न की अपनी मनमानी* *-बजे बांसुरी,...
भारत में मुस्लिम छात्र, खासकर पेशेवर क्षेत्रों में, शैक्षणिक सफलता की परंपरा को नया रूप दे रहे हैं। वे बाधाओं...
*-लिखो कवि वह क्रांति छंद तुम, जन-गण-मन में ज्वाल जलाओ* *-मैं कलम से हौसलों को वीर रस के छंद दूंगा*...
यह एक तरह की क्रांति है जो नारों या बैनरों के साथ अपनी घोषणा नहीं करती। यह खिड़कियां नहीं तोड़ती...