*जीबीएम कॉलेज में एनएसएस इकाई द्वारा डॉ भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर लघु संगोष्ठी एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन*

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*-एनएसएस स्वयंसेवकों ने “संविधान और महिलाएँ” विषय पर सारगर्भित आलेख लिखे एवं रंग-बिरंगे पोस्टर्स बनाए*

गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के सावित्री महाजन सभागार में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा भारतीय संविधान के जनक बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की 135वीं जयंती समारोह के तहत “संविधान तथा महिलाएँ” विषय पर लघु संगोष्ठी एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी की देखरेख में स्वयंसेवक छात्राओं ने आलेख लेखन प्रतियोगिता एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में बढ़चढ़कर भाग लिया। निधि कुमारी, शैली पाठक, नैना कुमारी, पूर्णिमा शर्मा, दीपशिखा मिश्रा, ज्योति कुमारी ने सारगर्भित आलेख लिखे तथा निर्दिष्ट विषय पर रंग-बिरंगे पोस्टर्स बनाए।

आलेख लेखन प्रतियोगिता में एनएसएस वॉलेंटियर नैना कुमारी प्रथम, निधि कुमारी द्वितीय एवं पूर्णिमा शर्मा तृतीय स्थान पर रहीं। तथा पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में ज्योति कुमारी प्रथम, पूर्णिमा शर्मा द्वितीय तथा शैली पाठक तृतीय स्थान पर रहीं। निर्णायक मंडल के सदस्यों में दर्शन शास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ जया चौधरी, सेहत केंद्र की नोडल अॉफिसर डॉ प्रियंका कुमारी एवं एनसीसी केयर टेकर अॉफिसर डॉ नगमा शादाब ने भूमिका निभाई। समारोह के दूसरे सत्र में प्रभारी प्रधानाचार्य प्रो सहदेब बाउरी के साथ पूरे महाविद्यालय परिवार ने बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण तथा पुष्पांजलि करके अपनी श्रद्धा प्रकट की।

लघु संगोष्ठी का संचालन करते हुए डॉ रश्मि ने डॉ अंबेडकर को बहुमुखी प्रतिभा का धनी, अध्ययनशील शिक्षाविद, अत्यंत संवेदनशील, मानवतावादी, विराट व्यक्तित्व एवं उदात्त सोच वाला महामानव बतलाया। डॉ अंबेडकर के संघर्षशील जीवन एवं संविधान निर्माण में उनकी अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। भारतीय समाज से लिंग, जाति, धर्म, संप्रदाय आदि के नाम पर वर्षों से चले आ रहे भेदभावों को दूर करने में बौद्ध धर्म से प्रेरित डॉ अंबेडकर के महत्वपूर्ण योगदानों को विभिन्न संदर्भों के माध्यम से समझाया। डॉ रश्मि ने महिलाओं के सशक्तीकरण में संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ अंबेडकर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

वहीं राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ शगुफ्ता अंसारी ने डॉ अंबेडकर को दलितों एवं शोषितों का मसीहा बतलाया। संविधान की प्रस्तावना में समाहित समानतावादी दर्शन पर विचार रखे। उनके आह्वान पर छात्राओं से संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी किया। डॉ शगुफ्ता ने संविधान की प्रस्तावना में छिपे भारतीय दर्शन को सविस्तार समझाया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. सहदेब बाउरी ने की। उन्होंने बाबा साहब को महान समाज सुधारक एवं शिक्षाविद बतलाया। छात्राओं से भारतीय संविधान के प्रति सम्मान की भावना रखने की बात कही। कहा कि हमें बाबा साहब के जीवन से प्रेरणा लेकर भेदभाव का विरोध करना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रो अफ्शां सुरैया, आचार्य नवीन कुमार, डॉ अनामिका कुमारी, डॉ कृति सिंह आनंद, डॉ प्यारे माँझी, डॉ अमृता कुमारी घोष, डॉ फरहीन वज़ीरी, डॉ बनीता कुमारी, डॉ आशुतोष कुमार पांडेय, डॉ शबाना परवीन हुसैन, डॉ विजेता लाल, डॉ फातिमा, डॉ नुद्रतुन निसां, डॉ वीणा कुमारी, डॉ गणेश प्रसाद, डॉ सीमा कुमारी, डॉ अमृता कुमारी, अभिषेक कुमार भोलू, रौशन कुमार, अजीत कुमखर, अनीषा, गीतांजलि, रानी, मुस्कान, मानसी, आस्था, कुमकुम, सपना, नेहा सहित सौ से अधिक छात्राओं की उपस्थिति रही।

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