पीड़ित अरुण चौहान ने जिला प्रशासन व सरकार से पायल सिनेमा की मालिकाना हक को लेकर सम्पूर्ण कार्यवाही कराए जाने की मांग की

0

thesoulofindia, Haridwar skbelwal
कोई वस्तु आप या आपके पूर्वज बड़े मन से ख़रीदे और फिर भी वह कागजों में आपकी न हो, अपने हिसाब से उसे प्रयोग करने के लिए आपको परेशान होना पड़े तो यह अजीब लगता है परन्तु भू मामलों में यह आम बात लगती है..और हक के मामले लम्बे चलते हैं तमाम परेशानियां आती हैं

उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम द्वारा संचालित पायल सिनेमा घर की नीलामी में सर्वाधिक बोली के बाद कब्ज़ा प्राप्त करने व स्वामित्व का दावा करने वाले अरुण चौहान ने प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि 1997 में टेंडर के तहत 36 लाख में सरकार द्वारा नीलामी के माध्यम से पायल सिनेमा घर उनके पिता ने खरीदा था। नीलामी के बाद उन्हें कब्जा भी दिला दिया गया था। उन्होंने लंबे समय तक सिनेमा का संचालन किया और सरकार को राजस्व भी दिया जाता रहा है। परन्तु उत्तर प्रदेश चल चित्र निगम के घाटे के चलते बंद होने और उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद हमारी भूमि ट्रांसफर की फ़ाइल को जिलाधिकारी को भेजने के बजाए सीधे उत्तराखंड शासन को भेज दिया गया जो फिर कहीं गुम हो गयी और हमें शारीरिक व मानसिक रूप से बहुत अधिक परेशान होना पड़ा,

श्री चौहान ने कहा काफ़ी मशक्क़त के बाद हम फ़ाइल ढूँढ़ने में कामयाब हुए और चल चित्र निगम के नाम से भूमि सम्बंधित कागज की प्रति भी हमने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त कर ली, इसमें यह साफ है की इसमें पट्टे जैसी और लीज अवधि जैसी कोई चीज नहीं है भेल प्रबंधिका का कोई हक हमारी नीलामी की भूमि पर नहीं है. अरुण चौहान ने एग्रीमेंट की कापी व अन्य कागजात दिखाते हुए कहा कि नीलामी के बाद पूरी रकम का भुगतान करने के बाद उन्हें मालिकाना हक दिया जाना चाहिए। जो 23 वर्षों में अभी तक नहीं मिला और इसके मुख्य जिम्मेदार भेल प्रबंधिका प्रशासन है. भेल प्रबंधिका द्वारा पायल सिनेमा को लेकर विवाद उत्पन्न कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है जबकि सिनेमा घर उसकी भूमि से उनका कोई लेना-देना नहीं है। अरूण चौहान ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने कोर्ट की शरण भी ली है। जिलाधिकारी को भी इस संबंध में सभी पत्रावली और कागजात दिखा चुके हैं। लेकिन भेल प्रबंधन द्वारा उन्हें नोटिस दिए जाने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया है। स्वामित्व को लेकर वह लगातार उत्तर प्रदेश एवं हरिद्वार जिला प्रशासन से पत्राचार कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सिनेमा घर का मालिकाना हक उन्हें सौपा जाए। उत्तर प्रदेश सरकार ने चल चित्र निगम को पुनः जीवित किया है जिससे सभी 15 सिनेमा घरों की नीलामी की स्वामित्व सम्बंधित कार्यवाही पूरी हो सके, अब हमें बहुत उम्मीद जगी है चूँकि तीन सिनेमा हालों की स्वामित्व की कार्यवाही पूरी हो चुकी है, हमें जिलाधिकारी हरिद्वार ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले में शीघ्र उचित कार्यवाही करेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share