डिग्री और पैकेज से नहीं, संस्कार और व्यवहार से बनेगी पहचानः मुख्यमंत्री धामी

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि डिग्री हासिल करने के बाद जिंदगी का असली एग्जाम शुरू होता है। जीवन में सफलता और असफलता दोनों मिलेंगी, लेकिन असफलता भी बहुत कुछ सिखाती है। युवाओं को हमेशा सीखने की भावना रखनी चाहिए और जीवन के अंतिम समय तक खुद को विद्यार्थी मानकर आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री गुरुवार को यूपीईएस के 24वें दीक्षा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने छात्रों को डिग्रियां प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा से विनम्रता आती है। विनम्रता दूसरों के प्रति सम्मान पैदा करती है और जीवन में सफलता दिलाती है।जीवन में किसी व्यक्ति की पहचान उसकी डिग्री, पैकेज या पद से नहीं, बल्कि उसके संस्कार और व्यवहार से होती है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने का दायित्व सभी का है। इसमें आप जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की भूमिका अहम होगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच युवाओं को जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है।उनके अनुसार, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के प्रयास हो रहे हैं। भारत में भी युवाओं को बरगलाकर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हुई। कुछ लोग भारत को नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते थे, लेकिन उनकी मंशा सफल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सूझबूझ से काम लेते हुए देश की स्थिति को नियंत्रित रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तकनीक का युग है और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। नई तकनीक के साथ कदमताल करने के साथ ही अपनी संस्कृति और संस्कारों को भी सहेजकर रखना जरूरी है। विकास और विरासत को साथ लेकर चलने से ही देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।

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