वर्चस्व की लड़ाई में दो बाघों की मौत

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हल्द्वानी। हल्द्वानी वन प्रभाग की छकाता रेंज में दो युवा नर बाघों के शव महज 20 मीटर की दूरी पर मिले हैं। शुरुआती जांच में दोनों की मौत टेरिटोरियल फाइट यानी जंगल में अपना इलाका बचाने की खूनी जंग में होने की आशंका जताई जा रही है। उत्तराखंड में पहली बार इस तरह दोनों बाघों की एक साथ मौत का मामला सामने आया है।
हल्द्वानी वन प्रभाग के छकाता रेंज स्थित सिमलिया के जंगल रविवार को उस समय सनसनी का केंद्र बन गए, जब जंगल के भीतर करीब एक किलोमीटर अंदर दो नर बाघों के शव मिले। हैरानी की बात यह रही कि दोनों शव एक-दूसरे से महज 20 मीटर की दूरी पर पड़े थे और आसपास खून के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार रात जंगल से लंबे समय तक बाघों की तेज दहाड़ और भीषण संघर्ष की आवाजें सुनाई देती रहीं। देर रात अचानक सब कुछ शांत हो गया। सुबह जब ग्रामीण जंगल के पास पहुंचे तो दोनों बाघ मृत मिले, जिसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी, चिकित्सकों की टीम और विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल की जांच में पंजों के गहरे निशान, संघर्ष के सबूत और घसीटे जाने के निशान मिले। एक बाघ की उम्र करीब तीन से चार वर्ष जबकि दूसरे की चार से पांच वर्ष आंकी गई है।
जांच में एक बाघ की गर्दन की मुख्य नस और दूसरे की जांघ की नस बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिली। शरीर पर गहरे घाव भी पाए गए। वन विभाग ने दोनों बाघों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी के बीच कराया और डीएनए समेत अन्य सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। सभी अंग, पंजे और नाखून सुरक्षित मिलने से अवैध शिकार की आशंका फिलहाल खारिज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब उनका दायरा मैदानों से पहाड़ी क्षेत्रों तक फैल चुका है। सीमित क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी के कारण नर बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर संघर्ष भी बढ़ रहे हैं। डीएफओ कुंदन कुमार के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आपसी टेरिटोरियल फाइट का प्रतीत होता है, हालांकि अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

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