आदिवासी छात्रों की शिक्षा के लिए श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय का अहम कदम।
💠त्रिपुरा सरकार ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत बीएड और डीएलएड संस्थानों के लिए किया एम्पैनल
उत्तरकाशी(उत्तराखंड)।
आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा से जोड़ने और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय,उत्तरकाशी ने महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय को त्रिपुरा सरकार की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (एसटी स्टूडेंट्स) के अंतर्गत बीएड एवं डीएलएड संस्थानों के लिए विधिवत रूप से एम्पैनल किया गया है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवान नौटियाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का मूल विश्वास है कि ‘‘पूरा भारत एक परिवार है’’। इसी भावना के अनुरूप संस्थान शिक्षा को सुलभ, किफायती और सर्वजन हितकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बनें, इसके लिए विश्वविद्यालय की नीतियां गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
त्रिपुरा के आदिवासी कल्याण मंत्री विकाश देबबर्मा के मुताबिक त्रिपुरा देश का पहला राज्य है, जिसने निजी बीएड एवं डीएलएड संस्थानों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया है। उन्होंने इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार बताया।
आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के सफल संचालन को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में आदिवासी कल्याण विभाग के अधिकारियों और एम्पैनल संस्थानों के प्रतिनिधियों ने योजना के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संस्थागत जिम्मेदारियों, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन तथा छात्रहित में छात्रवृत्ति योजना के सुचारु संचालन पर विशेष जोर दिया गया।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, यह पहल आदिवासी युवाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवान नौटियाल ने कहा कि संस्थान इस अवसर को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखता है और आदिवासी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का संकल्प है कि शिक्षा की पहुंच सुलभता, किफायत और गुणवत्ता के साथ समाज के अंतिम छोर तक सुनिश्चित हो।
