अंग्रेजी में मुद्रित एमडीडीए की योजनाओं में अंग्रेजी की जगह हिंदी राजभाषा को अपनाने की मांग

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देहरादून. अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित एमडीडीए के मास्टर प्लान 2041 को हिंदी भाषा में प्रकाशित किए जाने के बाद ही जुलाई में प्रस्तावित जनसुनवाई शेड्यूल को लागू करने की मांग संयुक्त नागरिक संगठन ने रखी है साथ शेड्यूल को सितंबर हेतु स्थगित करने की मांग व मुख्यमंत्री धामी जी के निर्देशों के अनुपालन में अंग्रेजी में मुद्रित एमडीडीए की योजनाओं में अंग्रेजी की जगह हिंदी राजभाषा को अपनाने की मांग भी संयुक्त नागरिक संगठन ने रखी है. संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा प्राधिकरण उपाध्यक्ष,मुख्यमंत्री,मुख्यसचिव,सचिव शहरी विकास,गढ़वाल आयुक्त, जिलाधिकारी,शहरी विकास मंत्री को लिखे गए पत्रों में एक बार फिर से अनुरोध किया गया है की योजना का प्रारूप हिंदी भाषा में भी प्रकाशित किया जाए।आमजन की भाषा हिंदी में बिना पढ़े लिखे सोचे समझे योजना पर आम जन द्वारा आपत्तियां देना असंभव है। संगठन सचिव सुशील त्यागी ने लिखा है की प्राधिकरण ने अतीत में अनेक मास्टर प्लान बनाए हैं परंतु इनके परिणाम आज शहर की सड़कों पर अतिक्रमण और सड़कों पर ट्रैफिक जाम, गलियों सड़कों पर पार्किंग की समस्याएं,कंक्रीट के जंगल,प्रदूषित वातावरण और पर्यावरण के विनाश के रूप में सामने आए हैं।स्थानीय निवासियों के हितों पर पर्यटन और कथित विकास को वरीयता दी गई है जिससे संतुलित विकास की अवधारणा ही प्रायः खत्म है और आश्चर्य तब है जब राज्य और राष्ट्रीय मंचों पर हमारे वैज्ञानिक,पर्यावरणविद,विशेषज्ञ, नेतागण संतुलित विकास पर गला फाड़ फाड़ के व्याख्यान दे रहे है जो भविष्य के लिए दुखद स्थिति है।संगठन का मानना है की मास्टर प्लान 2041 बनाने से पहले ही पीडब्लूडी,नगरनिगम,ट्रैफिक पुलिस, जलनिगम,जलसंस्थान,वनविभाग, खनन,सिंचाई,उद्यान,प्रदूषण बोर्ड,तकनीकी राष्ट्रीय संस्थानों,शासन, प्रशासन सहित स्थानीय सेवानिवृत्त अधिकारियों,प्रबुद्ध नागरिकों के सुझाव भी मसौदा बनाने से पहले शामिल कर लिए जाते तो

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