*जीबीएम कॉलेज में एनएसएस इकाई द्वारा “नशा मुक्त हो राष्ट्र हमारा” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन*
*-सुदृढ़, सुरक्षित, उन्नत एवं सभ्य राष्ट्र के निर्माण के लिए नशासेवन की समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने की है आवश्यकता*
गया जी। गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ सहदेब बाउरी की अध्यक्षता में एवं एनएसएस प्रोग्राम अॉफिसर डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी के समन्वयन में कॉलेज की एनएसएस इकाई द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान के तहत “नशा मुक्त हो राष्ट्र हमारा” विषय पर एक दिवसीय अॉनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मियों एवं एनएसएस स्वयंसेवक शिवानी सिंह, निधि कुमारी, खुशी कुमारी आदि ने भाग लिया। एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ रश्मि ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए “नशा मुक्ति अभियान” के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि नशा सेवन की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए हमारे युवाओं को नशासेवन के दुष्परिणामों को जानने और समझने की आवश्यकता है। साथ ही, समाज को भी जागरूक करने की जरूरत है। नशा मुक्ति अभियान का लक्ष्य ही एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है, जिससे कि देश के युवाओं को नशे के चंगुल में फँसने से रोका जा सके और उनकी ऊर्जा, प्रतिभा, एवं जीवन को राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगाया जा सके। नशासेवन की प्रवृत्ति समाज में घरेलू हिंसा को भी बढ़ाती है, जिससे परिवार की शांति एवं प्रगति बुरी तरह प्रभावित होती है। नशे की लत तंत्रिका तंत्र पर बहुत ही नकारात्मक असर डालता है, जिससे तनाव, डिप्रेशन, अत्यधिक चिंता, चिड़चिड़ापन और मतिभ्रम जैसी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ रश्मि ने समाज के सभी उम्र के लोगों को, विशेषकर युवाओं को नशे की लत से कोसों दूर रहने की बात कही। कहा कि सुदृढ़, सुरक्षित, उन्नत, एवं सभ्य राष्ट्र के निर्माण के लिए नशासेवन की समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने की आवश्यकता है।
एनसीसी सीटीओ डॉ नगमा शादाब ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए, क्योंकि नशासेवन उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षमताओं को कमजोर तथा नष्ट कर डालता है। डॉ नगमा ने एनएसएस स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों को मिलकर नशामुक्ति अभियान चलाने कहा। अंग्रेजी विभाग की सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा ने कहा कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। नशा सेवन शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर डालता है और व्यक्ति जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लग जाता है, और उसका मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ जाता है। सेहत केन्द्र की नोडल अधिकारी डॉ प्रियंका कुमारी ने कहा कि नशे के कारण भूख कम लगती है, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है। फेफड़े, लिवर, किडनी, और हृदय से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। डॉ शुचि सिन्हा ने आपराधिक गतिविधियों में बढ़ोतरी के पीछे नशासेवन को एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने महिलाओं को नशा मुक्ति अभियान में बढ़चढ़कर भाग लेने की बात कही।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सहदेब बाउरी ने कहा कि नशे की लत के कारण व्यक्ति अपनी जमा पूंजी और आय का बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च कर देता है, जिससे परिवार कर्ज में डूब जाता है। उन्होंने एनएसएस स्वयंसेवकों को अपने घर में और आस-पड़ोस के लोगों को नशासेवन के दुष्प्रभावों से परिचित करवाते रहने के लिए अनुरोध किया। एनएसएस स्वयंसेवक शिवानी सिंह ने कहा कि एनएसएस इकाई की ओर से कॉलेज की स्वयंसेवक छात्राएं समाज के लोगों को नशामुक्ति अभियान से जोड़ने की पूरी कोशिश करेंगी। संगोष्ठी में प्रो अफ्शां सुरैया, डॉ शगुफ्ता अंसारी, डॉ कृति सिंह आनंद, डॉ अनामिका कुमारी, डॉ बनीता कुमारी, डॉ आशुतोष पांडेय, डॉ रुखसाना परवीन, डॉ प्यारे माँझी, डॉ शुचि सिन्हा, डॉ सीता, रौशन कुमार, राजेश कुमार आदि की उपस्थिति रही।
